परोपकार
परोपकार का अर्थ:
'परोपकार' शब्द 'पर' + 'उपकार' से बना है, जिसका अर्थ है — दूसरों की भलाई करना। स्वयं कष्ट सहकर भी दूसरों के हित में कार्य करना ही सच्चा परोपकार है।
महापुरुषों एवं प्रकृति के उदाहरण:
रंतिदेव ने भूखे अतिथियों को अपना भोजन दे दिया। दधीचि ने देवताओं की रक्षा के लिए अपनी अस्थियाँ दान कर दीं। कर्ण अपनी अंतिम साँस तक दान देते रहे। प्रकृति भी परोपकार का संदेश देती है — नदी अपना जल स्वयं नहीं पीती, वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते, बादल दूसरों के लिए बरसते हैं।
सामाजिक जीवन में परोपकार आवश्यक क्यों:
परोपकार से समाज में प्रेम, एकता और सहयोग की भावना बढ़ती है। जो व्यक्ति दूसरों के काम आता है, वही सच्चे अर्थों में मनुष्य कहलाने योग्य है। परोपकारी व्यक्ति समाज में सम्मान पाता है और उसका जीवन सार्थक बनता है।