टोपी अपनी दादी सुभद्रादेवी को नापसंद करता था क्योंकि वे कठोर, रूढ़िवादी और टोपी के प्रति निर्दयी थीं। जब टोपी ने 'अम्मी' शब्द बोला तो दादी ने उसे डाँटा और मुस्लिम दोस्त इफ़्फ़न से मित्रता पर उसे परेशान किया। वे इफ़्फ़न के घर जाने पर भी आपत्ति करती थीं। इसके विपरीत इफ़्फ़न की दादी प्रेमपूर्ण, स्नेही और मधुर भाषा बोलने वाली थीं। टोपी ने स्वयं कहा — "तोरी दादी की जगह हमरी दादी मर गई होतीं त ठीक भय होता।" इससे स्पष्ट है कि अपनी दादी से उसे नफ़रत थी।
Source: टोपी शुक्ला, खंड 1-2
---