"वर्तमान में विद्यालयों में बढ़ती हुई अनुशासनहीनता को देखते हुए मास्टर प्रीतमचंद जैसे अध्यापकों की आवश्यकता है ।" इस कथन से सहमति या असहमति के संबंध में अपने तर्कसम्मत विचार लिखिए ।
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:20 · grounding rag
Model Answer
इस कथन से मैं आंशिक असहमति रखता/रखती हूँ।
मास्टर प्रीतमचंद कठोर अनुशासनप्रिय अध्यापक थे। उनके भय से विद्यार्थी कतार में सीधे खड़े रहते, स्काउट परेड में अनुशासन बनाए रखते और उनकी एक 'शाबाश' बच्चों को फ़ौजी तमगे जैसी लगती थी। इस दृष्टि से कठोर अनुशासन उपयोगी है।
परंतु चौथी श्रेणी के बच्चों को पीठ ऊँची कर कान पकड़वाना जैसी क्रूर सजा उचित नहीं। हेडमास्टर शर्मा जी ने इसे बर्बरता माना और उन्हें निलंबित किया। आधुनिक बाल-मनोविज्ञान के अनुसार भय नहीं, प्रेम और प्रोत्साहन से अनुशासन स्थायी होता है।
अतः अनुशासन आवश्यक है, किंतु शारीरिक दंड नहीं।
Source: सपनों के-से दिन, अध्याय 2
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Explanation
- यह मूल्यपरक प्रश्न है — दोनों पक्ष रखें और पाठ के प्रमाण दें।
- पाठ से दो बिंदु ज़रूर लिखें: (1) पीटी साहब की 'शाबाश' का प्रभाव, (2) हेडमास्टर द्वारा निलंबन — यही परीक्षक देखते हैं।
- अंत में स्पष्ट निष्कर्ष लिखें। 'आंशिक सहमति/असहमति' सबसे सुरक्षित और तर्कसम्मत उत्तर है।
- 3 अंक = लगभग 3 बिंदु / 60-80 शब्द — इससे अधिक न लिखें।