'हैं झाँक रहे नीरव नभ पर' 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता से ली गई पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए ।
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Model Answer
इन पंक्तियों में कवि पर्वत पर उगे ऊँचे-ऊँचे वृक्षों का मानवीकरण करते हैं। पर्वत के हृदय (गहराई) से उठकर वृक्ष उच्चाकांक्षाओं से भरे हुए शांत आकाश को एकटक, स्थिर और कुछ चिंतित भाव से झाँक रहे हैं। 'अनिमेष' (पलक न झपकाते हुए) और 'अटल' शब्द दर्शाते हैं कि ये वृक्ष किसी गहरे चिंतन में लीन हैं। वे उस मनुष्य के समान हैं जो महत्वाकांक्षी तो है, किंतु लक्ष्य की अनिश्चितता से चिंतित भी है।
Source: पर्वत प्रदेश में पावस, प्रश्न-अभ्यास (ख)-3
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Explanation
- यह पंक्ति मानवीकरण अलंकार का उदाहरण है — वृक्षों को उच्चाकांक्षी और चिंताग्रस्त मनुष्य की तरह दिखाया गया है।
- तीन मुख्य बिंदु लिखें: (1) गिरिवर के उर = पर्वत की गोद से उठना, (2) उच्चाकांक्षा से आकाश देखना, (3) अनिमेष + अटल + चिंतापर — स्थिर किंतु चिंतित भाव।
- 'नीरव नभ' = शांत आकाश — इस बिंब का उल्लेख करना न भूलें।