'अब कहाँ दूसरों के दुःख से दुःखी होने वाले' पाठ के आधार पर लिखिए कि लेखक की माँ द्वारा उन्हें समय-समय पर क्या निर्देश दिए जाते थे ? उन निर्देशों के माध्यम से पाठकों को क्या सीख दी गई है ?
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding rag
Model Answer
लेखक की माँ उन्हें निम्नलिखित निर्देश देती थीं:
- सूरज ढले आँगन के पेड़ों से पत्ते मत तोड़ो, पेड़ रोएँगे।
- दीया-बत्ती के वक्त फूलों को मत तोड़ो, फूल बददुआ देते हैं।
- दरिया पर जाओ तो उसे सलाम किया करो।
- कबूतरों को मत सताओ।
- मुर्गे को परेशान मत करो।
सीख: इन निर्देशों के माध्यम से पाठकों को यह सीख दी गई है कि प्रकृति के हर जीव — पेड़, पक्षी, नदी — के प्रति संवेदना और सम्मान का भाव रखना चाहिए। सभी प्राणियों के दुख में दुखी होना ही सच्ची मानवता है।
Source: अब कहाँ दूसरों के दुःख से दुःखी होने वाले, Chapter 12
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Explanation
- The question has two parts: (i) माँ के निर्देश and (ii) उनसे मिली सीख — cover both.
- Directly quote/paraphrase the instructions from the passage; the examiner expects textual accuracy.
- The "सीख" part should connect the instructions to the broader theme of the lesson: compassion toward all living beings and nature.
- 3 marks = ~3-4 instructions + 1-2 lines on the lesson's message. Do not write more.