'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में वर्णित पर्वतीय प्रदेश की सुंदरता का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए ।
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Model Answer
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में कवि सुमित्रानंदन पंत ने वर्षा ऋतु के पर्वतीय सौंदर्य का अद्भुत चित्रण किया है। मेखलाकार (करधनी के आकार का) विशाल पर्वत अपने हज़ारों फूल-रूपी नेत्रों से नीचे फैले तालाब में अपना विशाल प्रतिबिंब निहारता है। झरने मोती की लड़ियों जैसे सुंदर दिखते हैं। ऊँचे वृक्ष उच्चाकांक्षा से आकाश की ओर झाँकते हैं। अचानक बादलों के छा जाने से लगता है जैसे आकाश धरती पर टूट पड़ा हो और इंद्र जादू खेल रहा हो।
Source: पर्वत प्रदेश में पावस, chapter 4
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Explanation
- Key images to cover: मेखलाकार पर्वत + तालाब (दर्पण), झरने (मोती की लड़ियाँ), ऊँचे वृक्ष (उच्चाकांक्षा), बादलों का जादू (इंद्रजाल) — these four images score full marks.
- Do not copy poem lines directly; paraphrase in your own words as the question demands (अपने शब्दों में).
- Mention the season clearly: पावस/वर्षा ऋतु for context marks.