Q1. [5]
सुखिया सब संसार है, खायै अरू सोवै ।
दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै ।।
बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ ।
राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ ।।
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
- (i) पहले दोहे में 'सोना' और 'जागना' प्रतीकार्थ है – [1]
- A अज्ञानता और ज्ञान का
- B निष्क्रियता और सक्रियता का
- C अचेतना और चेतनता का
- D निर्जीवता और सजीवता का
- (ii) कबीर दुखी हैं क्योंकि वे – [1]
- A एकाकी जीवन व्यतीत कर रहे हैं ।
- B ईश्वर से वियोग के कारण व्यथित हैं ।
- C सांसारिक सुखों का भोग नहीं कर पा रहे हैं ।
- D ईश्वरीय सत्य से लोगों को परिचित नहीं करवा पा रहे हैं ।
- (iii) 'मंत्र न लगना' का आशय है – [1]
- A मंत्रों का निष्फल होना
- B पूजा-पाठ का काम न आना
- C कोई उपाय काम न आना
- D मंत्रोच्चार की विधि न जानना
- (iv) राम वियोगी व्यक्ति की तुलना किससे की गई है ? [1]
- A विक्षिप्त व्यक्ति से
- B विरह रूपी व्यक्ति से
- C विष युक्त सर्प के तन से
- D विरह रूपी सर्प से ग्रसित व्यक्ति से
- (v) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए । उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए : कथन : सांसारिक मनुष्य सुख-पूर्वक जीवन यापन कर रहे हैं । कारण : वह भौतिक सुखों को ही सच्चा सुख मानते हैं । [1]
- A कथन तथा कारण दोनों गलत हैं ।
- B कारण सही है, किंतु कथन गलत है ।
- C कथन सही है, लेकिन कारण कथन की गलत व्याख्या करता है ।
- D कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है ।
Previously asked in CBSE board exam
2024 4/3/1 Q7
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding stimulus+chapter
Model Answer
(i) A — अज्ञानता और ज्ञान का
(ii) B — ईश्वर से वियोग के कारण व्यथित हैं ।
(iii) C — कोई उपाय काम न आना
(iv) D — विरह रूपी सर्प से ग्रसित व्यक्ति से
(v) D — कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है ।
Source: कबीर (साखी), स्पर्श (पद्य खंड)
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Explanation
- (i) 'सोना' = अज्ञान/मोह की नींद में डूबे रहना; 'जागना' = ईश्वर-चिंतन में सजग रहना — यही कबीर का प्रतीकार्थ है।
- (ii) कबीर राम (ईश्वर) के वियोग में रोते और जागते हैं — यही उनके दुःख का मूल कारण है।
- (iii) 'मंत्र न लागै' = विरह-रूपी सर्प के लिए कोई भी उपाय/झाड़-फूँक काम नहीं आती।
- (iv) दूसरे दोहे में 'बिरह भुवंगम' (विरह-सर्प) से डसे हुए राम-वियोगी व्यक्ति की बात है, जो या तो जीवित नहीं रहता या पागल हो जाता है।
- (v) पहले दोहे में स्पष्ट है कि संसारी लोग खाने-सोने (भौतिक सुखों) में लीन हैं इसीलिए सुखी हैं — कथन और कारण दोनों सटीक हैं।
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