'सपनों के से दिन' पाठ के आधार पर लिखिए कि बच्चों का खेलकूद में अधिक रुचि लेना अभिभावकों को अप्रिय क्यों लगता है ? पढ़ाई के साथ खेलों का छात्र जीवन में क्या महत्त्व है ? इससे किन जीवन-मूल्यों की प्रेरणा मिलती है ?
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:20 · grounding rag
Model Answer
अभिभावकों को खेलकूद अप्रिय क्यों लगता है:
पाठ में वर्णित है कि बच्चे खेलते समय गिरकर चोट खाते, कपड़े फाड़ते और गंदे होकर लौटते थे। माँ-बाप इसे समय और ऊर्जा की बर्बादी समझते थे। उन्हें लगता था कि पढ़ाई से ही भविष्य बनेगा, खेल से नहीं।
छात्र जीवन में खेलों का महत्त्व:
खेल से शारीरिक और मानसिक विकास होता है। पाठ में बाल-मनोविज्ञान का उल्लेख है जो बताता है कि खेल बच्चों की स्वाभाविक आवश्यकता है। स्काउटिंग जैसी गतिविधियाँ अनुशासन, आत्मविश्वास और टीम भावना सिखाती हैं।
जीवन-मूल्यों की प्रेरणा:
खेल से सहयोग, अनुशासन, हार-जीत को समभाव से स्वीकार करना और परिश्रम जैसे जीवन-मूल्य विकसित होते हैं।
Source: सपनों के से दिन, Chapter 2
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Explanation
- The question has 3 parts — examiners expect all three to be addressed briefly.
- Ground your answer in the text: the passage explicitly mentions बाल-मनोविज्ञान and स्काउटिंग — use these references to score marks.
- The phrase "पिटाई होने पर भी फिर खेलने चले आते" shows खेल is a natural need — cite this reasoning.
- Keep life-values (जीवन-मूल्य) crisp: 2–3 values with one-word/short justification each.