Q1. [5]
प्रायः ऐसा होता है, कोई भी वक्तव्य सुनने के बाद जब सुनने वालों से पूछें कि क्या बोला गया है, तो सौ लोगों के सौ जवाब मिलते हैं; जितने सुनने वाले, उतने ही अर्थ । इसलिए आपस में बड़े विवाद भी होते हैं । बुद्ध से एक बार उनके शिष्य ने पूछा, 'क्या हम वही सुन पाते हैं, जो आप बोलते हैं ? जब मैं दूसरों से बात करता हूँ, तो पता चलता है कि उन्होंने कुछ और सुना, जबकि मैंने कुछ और ।' बुद्ध ने कहा, "यह स्वाभाविक है । बोली तो एक ही बात जाती है, लेकिन सुनी उतनी जाती है जितने सुनने वाले हैं, क्योंकि तुम मन से सुनते हो, आत्मा से नहीं । कल रात मैंने अंतिम प्रवचन के बाद कहा कि-उठो; रात्रि का अंतिम कार्य करो । कल समागम में एक चोर और एक गृहस्थ भी आए थे । जब मैंने कहा कि अब रात्रि के अंतिम काम में संलग्न हो जाओ, तब तुम्हें ख्याल आया ध्यान का, चोर ने सोचा कि काफी रात हो गई, चाँद ऊपर चढ़ गया है, अब चौर्यकर्म का वक्त हुआ । गृहस्थ ने सोचा, बहुत देर हो गई, पता नहीं, घर जाने के लिए कोई वाहन अब मिलेगा भी या नहीं ? मैंने एक ही बात कही थी । गृहस्थ ने अपना अर्थ लिया और चोर ने अपना । फिर भिक्षुओं ने भी इसके अलग-अलग अर्थ ही लिए होंगे ।
सुनना बहुत कठिन बात है, क्योंकि सुनने की कला वास्तव में कभी सिखाई नहीं जाती । बोलने की कला के तो बड़े प्रशिक्षण दिए जाते हैं । मगर यदि सुनने वाले सही न हों तो अर्थ का अनर्थ हो जाता है । सुनने के लिए आपका मन शांत और स्वीकार भाव में होना चाहिए ।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
- (i) कहे गए वक्तव्य का, अलग-अलग लोगों द्वारा अलग-अलग जवाब क्यों मिलता है ? [1]
- A प्रत्येक व्यक्ति द्वारा अपनी मनःस्थिति के अनुरूप अर्थ लगाने के कारण
- B प्रत्येक व्यक्ति द्वारा अपनी योग्यता के अनुरूप अर्थ लगाने के कारण
- C कही गई बात को ध्यान से न सुन पाने के कारण
- D कही गई बात का महत्त्व न जानने के कारण
- (ii) गद्यांश के आधार पर लोगों के बीच विवाद का कारण है – [1]
- A कही गई बात का अर्थ न समझ पाना ।
- B स्वयं को दूसरे से श्रेष्ठ सिद्ध समझना ।
- C अपनी ही बात को सही ठहराना ।
- D अपने सामने दूसरों को महत्त्व न देना ।
- (iii) शिष्य द्वारा बुद्ध से क्या पूछा गया ? [1]
- A संसार में लोगों के दुखों का कारण
- B लोगों के बीच आपसी विवाद का कारण
- C दो व्यक्तियों के बीच भिन्नता का कारण
- D कही गई एक ही बात के भिन्न अर्थ ग्रहण करने का कारण
- (iv) गृहस्थ की चिंता का क्या कारण था ? [1]
- A रात का काफी समय बीत जाना ।
- B वाहन के न मिलने की आशंका ।
- C बुद्ध की बातों का अर्थ न समझ पाना ।
- D देर रात्रि में अकेले घर जाना ।
- (v) सुनने के लिए आवश्यकता है – [1]
- A वक्ता की बात में स्पष्टता की
- B आसपास के वातावरण में शांति की
- C सहज सरल शब्दों में बात कही जाने की
- D मन के शांत और स्वीकार भाव में होने की
Previously asked in CBSE board exam
2024 4/2/1 Q2
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:15 · grounding stimulus
Model Answer
(i) A — प्रत्येक व्यक्ति द्वारा अपनी मनःस्थिति के अनुरूप अर्थ लगाने के कारण
(ii) A — कही गई बात का अर्थ न समझ पाना ।
(iii) D — कही गई एक ही बात के भिन्न अर्थ ग्रहण करने का कारण
(iv) B — वाहन के न मिलने की आशंका ।
(v) D — मन के शांत और स्वीकार भाव में होने की
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Explanation
- (i): बुद्ध स्वयं कहते हैं — "तुम मन से सुनते हो, आत्मा से नहीं" — अर्थात हर व्यक्ति अपनी मनःस्थिति के अनुसार अर्थ लगाता है। विकल्प A सटीक है।
- (ii): गद्यांश की पहली पंक्ति में स्पष्ट है — जितने सुनने वाले, उतने अर्थ → इसीलिए विवाद होता है, अर्थात अर्थ न समझ पाना कारण है।
- (iii): शिष्य ने पूछा — "क्या हम वही सुन पाते हैं जो आप बोलते हैं?" — यानी एक बात के भिन्न अर्थ ग्रहण का कारण।
- (iv): गद्यांश में गृहस्थ की सोच — "पता नहीं, घर जाने के लिए कोई वाहन अब मिलेगा भी या नहीं?" → विकल्प B।
- (v): अंतिम वाक्य सीधे उत्तर देता है — "सुनने के लिए आपका मन शांत और स्वीकार भाव में होना चाहिए।"
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