बादलों से पर्वत के छिप जाने पर कवि की कल्पना, 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए ।
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Model Answer
जब बादल पर्वत को ढक लेते हैं, तो कवि की कल्पना है कि विशालकाय पर्वत अचानक अदृश्य हो गया, मानो उसने अपने पंख समेटकर कहीं उड़ान भर ली हो। कवि को लगता है जैसे पर्वत ने माया फैला दी हो और वह अपनी विशालता को बादलों में छुपाकर इंद्र का इंद्रजाल रच रहा हो।
Source: पर्वत प्रदेश में पावस, प्रश्न-अभ्यास, Chapter 4
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Explanation
- परीक्षा में इस प्रश्न के उत्तर में पर्वत के बादलों में छिपने की कवि की कल्पना / भ्रम का उल्लेख ज़रूरी है।
- कविता में कवि ने कल्पना की है कि पर्वत ने मानो पंख लगाकर उड़ान भरी — यह मानवीकरण अलंकार का उदाहरण है।
- इंद्रजाल (जादू) वाला बिंब भी उत्तर को पूर्ण बनाता है।
- 2 अंक के लिए एक-दो वाक्यों में स्पष्ट कल्पना का उल्लेख पर्याप्त है।