नहीं, मित्रता की कसौटी मजहब, जाति, पद-प्रतिष्ठा नहीं हो सकती। टोपी (हिंदू) और इफ़्फ़न (मुस्लिम) अलग-अलग मजहब के थे, फिर भी उनकी दोस्ती अटूट थी। इसी तरह टोपी और इफ़्फ़न की दादी का रिश्ता — एक आठ साल का बच्चा और एक बहत्तर साल की बुजुर्ग — किसी सामाजिक बंधन को नहीं मानता था।
मित्रता की असली कसौटियाँ हैं:
Source: टोपी शुक्ला, खंड 1–2
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परीक्षक इस प्रश्न में दो बातें देखते हैं: (1) पाठ के आधार पर यह सिद्ध करना कि मजहब/पद-प्रतिष्ठा मित्रता की कसौटी नहीं है — टोपी-इफ़्फ़न और टोपी-दादी के उदाहरण देना जरूरी है। (2) मित्रता की सकारात्मक कसौटियाँ बताना। 3 अंक के लिए 2-3 उदाहरण/कसौटियाँ पर्याप्त हैं — विस्तार की जरूरत नहीं।