Q1. [5]
उड़ गया अचानक लो, भूधर
फड़का अपार पारद के पर!
रव-शेष रह गए हैं निर्झर!
है टूट पड़ा भू पर अंबर!
धँस गए धरा में सभय शाल!
उठ रहा धुआँ, जल गया ताल!
– यों जलद-यान में विचर-विचर
था इंद्र खेलता इंद्रजाल।
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
- (i) 'भूधर' के उड़ने से क्या अभिप्राय है ? [1]
- (A) पर्वतों के पंख लगना
- (B) पर्वतों का अदृश्य होना
- (C) पर्वतों का बादलों के पार जाना
- (D) पर्वतों का आकाश की ऊँचाई को छूना
- (ii) 'भूधर' किसके पंख लगाकर उड़ गए ? [1]
- (A) बादलों के
- (B) कल्पना के
- (C) बारिश के
- (D) कोहरे के
- (iii) 'रव-शेष रह गए हैं निर्झर' – का आशय है : [1]
- (A) केवल झरने दिखाई दे रहे हैं
- (B) केवल झरनों की ध्वनि शेष रह गई है
- (C) वृक्षों का अस्तित्व नष्ट हो गया है
- (D) पर्वतों का अस्तित्व नष्ट हो गया है
- (iv) 'है टूट पड़ा भू पर अंबर' – पंक्ति में अंबर के टूटने से क्या अभिप्राय है ? [1]
- (A) आकाश का धरती पर आक्रमण करना
- (B) आकाश द्वारा धरती पर मूसलाधार वर्षा करना
- (C) आकाश द्वारा धरती पर बिजली गिराना
- (D) आकाश का टूट कर धरती पर आ गिरना
- (v) काव्यांश में इंद्रजाल किसे कहा गया है ? [1]
- (A) पावस ऋतु में प्रकृति के पल-पल परिवर्तित रूप को
- (B) इंद्र के बादलों रूपी यान पर विचरण करने को
- (C) शाल के वृक्षों के गहरी खाई में छिप जाने को
- (D) तालाबों के चारों तरफ उड़ते घने धुएँ को
Previously asked in CBSE board exam
2025 4/3/1 Q9
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:13 · grounding stimulus+chapter
Model Answer
(i) (B) पर्वतों का अदृश्य होना
(ii) (A) बादलों के
(iii) (B) केवल झरनों की ध्वनि शेष रह गई है
(iv) (B) आकाश द्वारा धरती पर मूसलाधार वर्षा करना
(v) (A) पावस ऋतु में प्रकृति के पल-पल परिवर्तित रूप को
Source: पर्वत प्रदेश में पावस, सुमित्रानंदन पंत
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Explanation
- (i) बादलों ने पर्वतों को ढक लिया, जिससे वे अचानक अदृश्य हो गए — 'पर्वतों के पंख लगना' काव्य-कल्पना है पर प्रश्न 'अभिप्राय' पूछता है जो है — अदृश्य होना।
- (ii) 'पारद के पर' अर्थात् पारे जैसे चमकीले बादलों के पंख — भूधर बादलों के पर फड़काकर उड़े।
- (iii) 'रव-शेष' = केवल ध्वनि शेष; बादलों में झरने दिखना बंद हो गए, सिर्फ उनकी आवाज़ सुनाई दे रही है।
- (iv) 'अंबर टूटना' मूसलाधार वर्षा का बिम्ब है — मानो आकाश ही टूटकर धरती पर बरस पड़ा।
- (v) इंद्रजाल = जादू/माया। बादलों (जलद-यान) पर सवार इंद्र पावस में प्रकृति का रूप पल-पल बदलते हुए यह जादू रच रहे हैं।
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