जीव-जंतुओं के प्रति व्यवहार में निदाफाज़ली की माँ और पत्नी के व्यवहार के अंतर 'अब कहाँ दूसरों के दुख से दुखी होने वाले' पाठ के आधार पर लिखिए।
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Model Answer
निदा फ़ाज़ली की माँ जीव-जंतुओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील थीं। जब बिल्ली के कारण कबूतर के अंडे टूट गए तो उनकी आँखों में आँसू आ गए और उन्होंने पूरे दिन रोज़ा रखकर खुदा से माफ़ी माँगी।
इसके विपरीत, पत्नी ने कबूतरों की रोज़-रोज़ की परेशानी से तंग आकर उनके घोंसले वाली जगह पर जाली लगा दी, बच्चों को दूसरी जगह कर दिया और खिड़की बंद कर दी। इससे कबूतर रात-भर खामोश और उदास बैठे रहते हैं।
इस प्रकार माँ में करुणा थी जबकि पत्नी का व्यवहार व्यावहारिक किंतु असंवेदनशील था।
Source: अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले, Chapter 12
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Explanation
- The examiner expects contrast between the two characters — name both clearly and state what each did differently.
- Key evidence from the text: माँ का रोज़ा रखना और रोना vs. पत्नी का जाली लगाना और खिड़की बंद करना.
- End with a one-line conclusion summing up the contrast (करुणा vs. व्यावहारिकता) — this shows analytical thinking and earns full marks.