Q1. [7]
क्रोध कार्य-कारण के संबंध ज्ञान में त्रुटि या भूल होने पर धोखा देता है। क्रोध करने वाला जिस ओर से दुख आता है उसी ओर देखता है, अपनी ओर नहीं। जिसने दुख पहुँचाया है उसका नाश हो या उसे दुख पहुँचे, क्रुद्ध का यही लक्ष्य होता है। न तो वह यह देखता है कि मैंने कुछ किया है या नहीं, और न ही इस बात का ध्यान करता है कि क्रोध के वेग में मैं जो कुछ करूँगा उसका परिणाम क्या होगा। यही क्रोध का अंधापन है। इसी से एक तो मनोविकार ही एक-दूसरे को परिमित किया करते हैं, ऊपर से बुद्धि या विवेक भी इन पर अंकुश रखता है। यदि क्रोध इतना उग्र हुआ कि मन में दुखदाता की शक्ति के रूप और परिणाम के निश्चय, दया, भय आदि और भावों के संचार तथा उचित-अनुचित के विचार के लिए जगह ही न रही तो बड़ा अनर्थ खड़ा हो जाता है, जैसे यदि कोई सुने कि उसका शत्रु बीस-पच्चीस आदमी लेकर उसे मारने आ रहा है और वह चट क्रोध में व्याकुल होकर बिना शत्रु की शक्ति का विचार और अपनी रक्षा का पूरा प्रबंध किए उसे मारने के लिए अकेले दौड़ पड़े, तो उसके मारे जाने में बहुत कम संदेह समझा जाएगा। अत: कारण के यथार्थ निश्चय के उपरांत, उसका उद्देश्य अच्छी तरह समझ लेने पर ही आवश्यक मात्रा और उपयुक्त स्थिति में ही क्रोध वह काम दे सकता है जिसके लिए उसका विकास होता है।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए :
- (i) क्रोध धोखा कब देता है ? [1]
- (A) क्रोध करने वाले के मनोभावों का ज्ञान न होने पर
- (B) कार्य-कारण के संबंध में भूल होने पर
- (C) कार्य-कारण के संबंध में विश्वास होने पर
- (D) दुख पहुँचाने वाले के व्यवहार का ज्ञान न होने पर
- (ii) गद्यांश के मूल भाव को व्यक्त करने वाला/वाले कथन कौन-सा/से है/हैं ? उचित विकल्प चुनकर लिखिए :
I. बुद्धि और विवेक की भावना मनोविकारों पर अंकुश लगाते हैं।
II. दुखदाता की शक्ति का विचार किए बिना अकेले भिड़ना मूर्खता है।
III. आवश्यक और उचित मात्रा में किया गया क्रोध भी अनुचित है।
IV. शत्रु के अहंकार मर्दन के लिए क्रोध जरूरी है। [1]
- (A) केवल II सही है।
- (B) केवल IV सही है।
- (C) I और II दोनों सही हैं।
- (D) III और IV दोनों सही हैं।
- (iii) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यान से पढ़िए और सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए :
कथन : कारण और परिस्थिति के अनुरूप किया गया क्रोध ही उपयुक्त है।
कारण : परिस्थिति के अनुरूप बुद्धि का प्रयोग कर, परिमित क्रोध करने से भयंकर दुष्परिणामों से बचा जा सकता है। [1]
- (A) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
- (B) कारण ग़लत है, लेकिन कथन सही है।
- (C) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
- (D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) क्रोध को अंधा क्यों कहा गया है ? [2]
- (v) क्रोध कब अनर्थकारी रूप धारण कर लेता है ? [2]
Previously asked in CBSE board exam
2025 4/3/1 Q1
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:15 · grounding stimulus
Model Answer
(i) (B) कार्य-कारण के संबंध में भूल होने पर
(ii) (C) I और II दोनों सही हैं।
(iii) (D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
(iv) क्रोध को अंधा इसलिए कहा गया है क्योंकि क्रुद्ध व्यक्ति केवल दुख देने वाले की ओर देखता है, अपनी ओर नहीं। वह न तो यह सोचता है कि स्वयं उसने कुछ किया या नहीं, और न ही यह विचार करता है कि क्रोध के वेग में किए गए कार्य का परिणाम क्या होगा। इस प्रकार वह अपने कर्म और उसके फल — दोनों के प्रति अंधा हो जाता है।
(v) जब क्रोध इतना उग्र हो जाए कि मन में दुखदाता की शक्ति का विचार, दया, भय तथा उचित-अनुचित के विवेक के लिए कोई स्थान न रहे, तब वह अनर्थकारी रूप धारण कर लेता है। जैसे बीस-पच्चीस शत्रुओं की सेना की परवाह किए बिना अकेले दौड़ पड़ना स्वयं के विनाश का कारण बनता है। अतः बुद्धि और विवेक का अभाव क्रोध को विनाशकारी बना देता है।
Source: गद्यांश — क्रोध (मनोविकार संबंधी निबंध)
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Explanation
- (i)–(iii) are MCQs — one line each is sufficient; no justification needed unless asked.
- (iv) 2 marks → 2 key points: (a) क्रुद्ध व्यक्ति दूसरे को देखता है, खुद को नहीं; (b) परिणाम का ध्यान नहीं — this is the "अंधापन."
- (v) 2 marks → focus on: उग्र क्रोध में विवेक/बुद्धि की जगह नहीं रहती → उदाहरण (अकेले दौड़ना) → अनर्थ।
- Always quote or paraphrase directly from the passage in comprehension answers — examiners check passage-based evidence.
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