Q1. [5]
गिरि का गौरव गाकर झर-झर
मद में नस-नस उत्तेजित कर
मोती की लड़ियों-से सुन्दर
झरते हैं झाग भरे निर्झर !
गिरिवर के उर से उठ-उठ कर
उच्चाकांक्षाओं से तरुवर
हैं झाँक रहे नीरव नभ पर
अनिमेष, अटल, कुछ चिंता पर ।
निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए :
- (i) झरने पर्वतों के यश का गुणगान क्यों कर रहे हैं ? [1]
- (A) प्रसन्नता अभिव्यक्त करने के लिए
- (B) उनका आभार प्रकट करने के लिए
- (C) पर्वतों की महानता दर्शाने के लिए
- (D) जोश, उमंग, उत्साह प्रकट करने के लिए
- (ii) 'मद में नस-नस उत्तेजित कर' – पंक्ति के संदर्भ में बताइए, किसकी नस-नस मद में उत्तेजित होने की बात कही जा रही है ? [1]
- (A) कवि की
- (B) पर्वतों की
- (C) झरनों की
- (D) वृक्षों की
- (iii) पर्वतों पर लगे वृक्ष किसे छूना चाहते हैं ? [1]
- (A) आकाश की ऊँचाई को
- (B) पर्वतों की ऊँची चोटी को
- (C) पर्वतों की गहराई को
- (D) झरनों के सौंदर्य को
- (iv) पर्वत शिखरों पर लगे वृक्षों के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
I. वृक्ष पर्वतों के हृदय में उठने वाली उच्चाकांक्षाओं के मूर्त रूप हैं ।
II. वृक्ष साधकों की भाँति गंभीर चिंतन में लीन हैं ।
III. वृक्ष अनहोनी की आशंका से आकाश की ओर झाँक रहे हैं ।
IV. वृक्ष वर्षा की आशा से आकाश की ओर ताक रहे हैं । [1]
- (A) केवल I
- (B) केवल III
- (C) I और II दोनों
- (D) III और IV दोनों
- (v) काव्यांश के संदर्भ में 'अनिमेष' शब्द का अर्थ निम्नलिखित में से नहीं है : [1]
- (A) एकटक
- (B) निरंतर
- (C) स्थिर दृष्टि
- (D) निर्लिप्त
Previously asked in CBSE board exam
2025 4/2/1 Q9
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:13 · grounding stimulus+chapter
Model Answer
(i) (D) जोश, उमंग, उत्साह प्रकट करने के लिए
(ii) (A) कवि की
(iii) (A) आकाश की ऊँचाई को
(iv) (C) I और II दोनों
(v) (D) निर्लिप्त
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Explanation
- (i) झरने झर-झर बहते हुए पर्वत का गौरव गा रहे हैं, जिससे नस-नस में जोश और उत्साह भर जाता है।
- (ii) 'मद में नस-नस उत्तेजित' होने की बात कवि (या दर्शक/श्रोता) के संदर्भ में है — झरनों का संगीत सुनने वाले की नस-नस में उत्साह भर देता है।
- (iii) वृक्ष 'नीरव नभ पर' झाँक रहे हैं — अर्थात् आकाश की ऊँचाई छूना चाहते हैं।
- (iv) कथन I सही है (वृक्ष पर्वत की उच्चाकांक्षाओं के मूर्त रूप हैं) और कथन II भी सही है ('अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर' — साधकों जैसा गंभीर चिंतन)। III और IV का काव्यांश में कोई आधार नहीं है।
- (v) 'अनिमेष' का अर्थ है एकटक, बिना पलक झपकाए, स्थिर दृष्टि से — 'निर्लिप्त' इसका अर्थ नहीं है।
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