राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित 'तीसरी क़सम' फ़िल्म को प्रदर्शित करने के लिए वितरक क्यों नहीं मिल रहे थे ?
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding rag
Model Answer
'तीसरी कसम' एक संवेदनशील, कलात्मक और साहित्यिक फिल्म थी। इसकी संवेदना व्यावसायिक दृष्टि से सोचने वाले वितरकों की समझ से परे थी। वितरक केवल मुनाफे को ध्यान में रखते थे और उन्हें इस फिल्म में व्यावसायिक सफलता की संभावना नज़र नहीं आती थी।
Source: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र, प्रश्न-अभ्यास
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Explanation
- Examiners look for two key points: (1) फिल्म की संवेदना/कलात्मकता और (2) वितरकों की व्यावसायिक सोच।
- The source passage states: "दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने वाले की समझ से परे थी" — this is the core idea to include.
- Avoid writing more than 40–60 words for a 2-mark answer.