'एक संगठित समाज कृत-संकल्प हो तो कुछ भी कर सकता है ।' 'डायरी का एक पन्ना' पाठ के आधार पर इस कथन को सिद्ध कीजिए।
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Model Answer
26 जनवरी 1931 को कलकत्तावासियों ने संगठित होकर स्वतंत्रता दिवस मनाने का संकल्प लिया। पुलिस की कड़ी पाबंदी और लाठीचार्ज के बावजूद हजारों लोग, महिलाएँ और स्वयंसेवक मैदान में उमड़ पड़े। सुभाष बाबू की गिरफ्तारी के बाद भी भीड़ नहीं रुकी और झंडा फहराया गया। इस प्रकार जनता के संगठित संकल्प ने अंग्रेजी दमन को विफल कर दिया।
Source: डायरी का एक पन्ना, पाठ प्रवेश एवं पाठ
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Explanation
- प्रश्न 2 अंक का है, इसलिए 40–50 शब्दों में ठोस उदाहरण देना पर्याप्त है।
- उत्तर में पाठ के ठोस प्रमाण (सुभाष बाबू की गिरफ्तारी, महिलाओं की भागीदारी, झंडा फहराना) देना जरूरी है — केवल सामान्य कथन से अंक नहीं मिलते।
- कथन को "सिद्ध" करना है, इसलिए पहले संकल्प और फिर उसका परिणाम दोनों लिखें।