Q1. [5]
चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए ।
घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी ।
तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।
निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्पों का चयन करके लिखिए :
- (i) मनुष्य की वास्तविक सफलता क्या है ? [1]
- (A) सिर्फ स्वयं का उत्थान
- (B) सिर्फ समाज का उत्थान
- (C) स्वयं के साथ समाज का उत्थान
- (D) साथ चलने वालों का उत्थान
- (ii) इच्छित मार्ग की ओर कैसे बढ़ना चाहिए ? [1]
- (A) तेज़ी के साथ
- (B) शांति के साथ
- (C) खुशी के साथ
- (D) गर्व के साथ
- (iii) जीवन-पथ पर आगे बढ़ते हुए किस बात का ध्यान रखना चाहिए ? [1]
- (A) हर तरह के लोगों के साथ मिल-जुलकर आगे बढ़ना ।
- (B) स्वयं से अधिक दूसरों के सामर्थ्य पर भरोसा करना ।
- (C) पथ में सिर्फ समान विचारधारा वाले लोगों को साथ लेना ।
- (D) भिन्न विचार रखने वालों से दूर रहने का प्रयास करना ।
- (iv) 'मानव जीवन की सार्थकता स्वयं के साथ दूसरों को भी आगे बढ़ाने में है' – यह भाव किस पंक्ति में है ? [1]
- (A) घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी
- (B) अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हो सभी
- (C) तभी समर्थ भाव है कि तारता हुए तरे
- (D) वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे
- (v) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : हर तरह के भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्र का विकास करना चाहिए ।
कारण : सम्मिलित प्रयास से हुआ विकास अस्थाई प्रकृति का होता है । [1]
- (A) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं ।
- (B) कथन ग़लत है, लेकिन कारण सही है ।
- (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है ।
- (D) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है ।
Previously asked in CBSE board exam
2026 4/3/1 Q9
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:16 · grounding stimulus+chapter
Model Answer
(i) (C) स्वयं के साथ समाज का उत्थान
(ii) (C) खुशी के साथ
('सहर्ष खेलते हुए' — अर्थात् प्रसन्नतापूर्वक)
(iii) (A) हर तरह के लोगों के साथ मिल-जुलकर आगे बढ़ना।
(काव्यांश में कहा गया है — 'घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी')
(iv) (C) तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे
(दूसरों को तारते हुए स्वयं भी तरना — यही जीवन की सार्थकता है)
(v) (D) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
(काव्यांश में सम्मिलित प्रयास को प्रेरणा दी गई है, परंतु उसे 'अस्थाई' नहीं कहा गया — वास्तव में सामूहिक प्रयास स्थायी और सशक्त होता है।)
Source: मनुष्यता, अंतिम पद
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Explanation
- (i): "तारता हुआ तरे" = दूसरों को उबारते हुए स्वयं भी उबरना → स्वयं + समाज दोनों का उत्थान।
- (ii): "सहर्ष" का अर्थ है 'खुशी के साथ' — यह सीधा शब्द-अर्थ प्रश्न है।
- (iii): "घटे न हेलमेल… बढ़े न भिन्नता" स्पष्ट रूप से सभी के साथ मिलकर चलने की बात करता है।
- (iv): "तारता हुआ तरे" = खुद तरना + दूसरों को तारना — यही सार्थकता का भाव है। (D) में केवल बलिदान की बात है, सार्थकता की नहीं।
- (v): कथन सही है (भेदभाव से ऊपर उठना चाहिए), लेकिन कारण गलत है क्योंकि सम्मिलित प्रयास अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी व प्रभावशाली होता है।
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