राजू की समझदारी
राजू दसवीं कक्षा का होनहार छात्र था। एक दिन वह बाज़ार से घर लौट रहा था कि उसने देखा — एक बुजुर्ग व्यक्ति सड़क किनारे बेहोश पड़े हैं। आस-पास के लोग देखकर भी आगे बढ़ते जा रहे थे।
राजू ने बिना देर किए तुरंत एम्बुलेंस को फ़ोन किया। फिर उसने बुजुर्ग के सिर के नीचे अपना बस्ता रखा और उनके चेहरे पर पानी छिड़का। कुछ ही मिनटों में एम्बुलेंस आ गई।
डॉक्टर ने बताया कि समय पर सहायता न मिलती तो जान को ख़तरा हो सकता था। बुजुर्ग के परिवार ने राजू को धन्यवाद दिया।
राजू ने मन में सोचा — "सच्ची समझदारी वही है जो दूसरों के काम आए।"