टोपी के मुँह से 'अम्मी' शब्द सुनते ही खाने की मेज़ पर सन्नाटा छा गया। दादी सुभद्रादेवी ने गरजकर पूछा कि यह शब्द कहाँ से सीखा, और माँ रामदुलारी ने टोपी की पिटाई की। दोनों की यह प्रतिक्रिया संकीर्ण सांप्रदायिक सोच और धार्मिक पूर्वाग्रह को दर्शाती है। वे एक निर्दोष शब्द को मुस्लिम संस्कृति का 'आक्रमण' समझ बैठीं। जबकि 'अम्मी' और 'अम्माँ' दोनों का अर्थ एक ही है — माँ। टोपी ने यह शब्द इफ़्फ़न की दादी से स्नेह के कारण सीखा था, कोई बुरे इरादे से नहीं। यह प्रतिक्रिया बताती है कि बड़े लोग भाषा और धर्म की दीवारें खड़ी करते हैं, जबकि बच्चे स्वाभाविक रूप से प्रेम और मित्रता में भेद नहीं करते।
Source: टोपी शुक्ला, खंड 2
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