' सपनों के-से दिन' पाठ में लेखक ने बताया है कि कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती ।' अपने आस-पास के जीवन से कोई उदाहरण देकर इस कथन की पुष्टि कीजिए ।
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Model Answer
पाठ 'सपनों के-से दिन' में लेखक बताते हैं कि उनके साथी राजस्थान और हरियाणा से आए परिवारों के बच्चे थे। शुरू में उनकी बोली कम समझ आती थी और उनके कुछ शब्द सुनकर हँसी आती थी, परंतु खेलते समय सभी एक-दूसरे की बात खूब अच्छी तरह समझ लेते थे।
इसी प्रकार आज भी हम देखते हैं कि दिल्ली जैसे शहरों में पंजाबी, बंगाली, तमिल और हिंदी भाषी बच्चे एक साथ क्रिकेट या फुटबॉल खेलते हैं। खेल के मैदान में भाषा की भिन्नता कभी रुकावट नहीं बनती — संकेत, हाव-भाव और खेल की भावना सबको जोड़ देती है।
Source: सपनों के-से दिन, अनुभव और भावबोध
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Explanation
- परीक्षक चाहते हैं कि पहले पाठ से प्रमाण दें (राजस्थान/हरियाणा के बच्चों वाला प्रसंग), फिर अपने जीवन से उदाहरण जोड़ें।
- दो हिस्सों में लिखना ज़रूरी है — पाठ का संदर्भ + निजी उदाहरण।
- 'भाषा बाधा नहीं' — यह केंद्रीय विचार स्पष्ट रूप से उभरना चाहिए।
- 3 अंक के लिए ~70-80 शब्द पर्याप्त हैं; लंबा निबंध लिखने की ज़रूरत नहीं।