'विचार लो कि मर्त्य हो, न मृत्यु से डरो कभी' — 'मनुष्यता' कविता से उद्धृत प्रस्तुत पंक्ति का भाव कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए ।
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Model Answer
कवि मैथिलीशरण गुप्त कहते हैं कि मनुष्य को यह स्वीकार करना चाहिए कि वह नश्वर है — मृत्यु तो अवश्यंभावी है। इसलिए मृत्यु से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं। बल्कि ऐसा जीवन जियो और ऐसे मरो कि सभी लोग याद करें। परोपकार के लिए जीना-मरना ही सच्ची मनुष्यता है।
Source: मनुष्यता, स्पर्श (पद्य खंड), Chapter 3
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Explanation
- यह पंक्ति कविता के प्रथम छंद से है — परीक्षक चाहते हैं कि छात्र भाव स्पष्ट करे: मृत्यु का भय त्यागो + यादगार/परोपकारी मृत्यु की कामना करो।
- "सुमृत्यु" की अवधारणा को जोड़ना अंक के लिए सहायक है।
- उत्तर हिंदी में, स्पष्ट व संक्षिप्त भाषा में लिखें।