'पतझर में टूटी पत्तियाँ' के लेखक के अनुसार 'सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए ।' क्या आप लेखक के विचार से सहमत हैं ? अपने पक्ष के समर्थन या विरोध में तर्क सहित उत्तर दीजिए ।
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:19 · grounding rag
Model Answer
हाँ, मैं लेखक के विचार से सहमत हूँ।
लेखक ने 'ज़ेन की देन' में बताया है कि भूतकाल जा चुका है और भविष्यकाल अभी आया नहीं — इसलिए दोनों मिथ्या हैं। केवल वर्तमान क्षण ही सत्य है।
तर्क:
- भूत की यादों में उलझे रहने से दुःख बढ़ता है।
- भविष्य की चिंता मानसिक तनाव का कारण बनती है, जैसा जापानियों में हुआ।
- वर्तमान में जीने से मन शांत रहता है और जीवन का वास्तविक आनंद मिलता है।
जो व्यक्ति वर्तमान में जीता है, वही सच्चे अर्थों में जीवन जीता है।
Source: पतझर में टूटी पत्तियाँ, ज़ेन की देन
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Explanation
- यह एक मूल्य-आधारित / अभिव्यक्ति प्रश्न है। परीक्षक सहमति या असहमति दोनों स्वीकार करते हैं, लेकिन पाठ से जुड़ा तर्क अनिवार्य है।
- उत्तर में पाठ का सीधा संदर्भ (भूत-भविष्य मिथ्या, वर्तमान सत्य) देना अंक दिलाता है।
- असहमत हों तो लिखें: "भविष्य की योजना भी जरूरी है, लेकिन अत्यधिक चिंता हानिकारक है" — और पाठ से जोड़ें।
- 3 अंक के लिए: पक्ष (1) + पाठ-आधारित तर्क (2) पर्याप्त है।