Q1. [5]
उस छोटी लड़की का जीवन निराशा से भरा हुआ था । माता-पिता भी लाचार थे । वे चाहकर भी अपनी बेटी के लिए कुछ नहीं कर पाते थे । बचपन से ही वह चलने-फिरने में अक्षम थी । बैसाखी के बिना उसका एक कदम भी चलना मुश्किल था । एक शाम वह लड़की अपने घर के पास ही पार्क में चुपचाप बैठी थी । उसकी नजर पत्थर की उस मूर्ति पर पड़ी, जिसमें एक युवती दौड़ने की मुद्रा में खड़ी थी । वह मूर्ति इतनी जीवंत थी, गोया अभी दौड़ पड़ेगी । लड़की मूर्ति को देखकर सोचने लगी, क्या ऐसा नहीं हो सकता कि मैं भी उस मूर्ति की मुद्रा में दौड़ पाऊँ ? मुझे कोशिश तो करनी चाहिए ।
अगली सुबह वह उस प्रतिमा के पास देर तक उसी मुद्रा में टिकने की कोशिश करती, बार-बार गिरती, किंतु हरेक विफलता के साथ उसका हौसला दोगुना हो जाता । उसे घोर पीड़ा होती थी, पैर भी लहूलुहान हो जाते थे, किंतु उसने प्रयास करना नहीं छोड़ा और एक दिन वह अपने पैरों पर सीधी खड़ी हो गई ।
उस लड़की की अथक कोशिश में मानव जीवन के लिए एक गहरा संदेश छिपा है — हमारी सोच से ही हमारे जीवन और संस्कारों का निर्माण होता है । सोच सकारात्मक हो, उसके प्रति दृढ़ रहा जाए, तो हम दुनिया की हर तस्वीर को बदल सकते हैं । स्वामी विवेकानंद कहा करते थे, हम सभी वही होते हैं, जो हमारे विचार हमें बनाते हैं । इसलिए आप जो सोचते हैं उसके बारे में ध्यान रखना चाहिए । हमारे विचार दूर तक जाते हैं । हम अपने जीवन में हज़ारों बार असफल हो सकते हैं, लेकिन ख़ुद को कभी भी हारा हुआ नहीं समझना चाहिए । हालाँकि विफलता के बाद सोच को स्थिर रखना आसान नहीं होता । इसके लिए मस्तिष्क के अनुकूलन की जरूरत होती है । इसलिए नकारात्मक सोच से हमें सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि गिरना तो जीवन की कुदरती प्रक्रिया है ।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
- (i) छोटी लड़की का जीवन निराशापूर्ण क्यों था ?
- (a) माता-पिता की बेबसी के कारण
- (b) चलने-फिरने की अक्षमता के कारण
- (c) पैरों का इलाज ठीक से न होने के कारण
- (d) घर में आर्थिक अभावों के कारण
- (ii) छोटी लड़की के चलने का श्रेय जाता है :
- (a) छोटी लड़की के अथक प्रयासों को
- (b) छोटी लड़की की सकारात्मक सोच को
- (c) पार्क में दौड़ने की मुद्रा में लगी मूर्ति को
- (d) छोटी लड़की की सकारात्मक सोच व कोशिश को
- (iii) गद्यांश में प्रयुक्त 'मुद्रा' शब्द का उचित अर्थ है :
- (a) मुहर
- (b) आकृति
- (c) धन
- (d) सिक्का
- (iv) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
(क) हमारी सोच से ही हमारे जीवन और संस्कारों का निर्माण होता है ।
(ख) अपने विचारों के साथ दूसरों की सोच पर भी ध्यान दीजिए ।
(ग) नकारात्मक सोच से हमें सावधान रहने की जरूरत है ।
(घ) असफलता के बाद जीवन में आराम की जरूरत है ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ?
- (a) (क) और (ग)
- (b) केवल (क)
- (c) केवल (ख)
- (d) (क), (ख) और (ग)
- (v) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए । उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए ।
कथन (A) : विफलता के बाद सोच को स्थिर रखना आसान नहीं होता ।
कारण (R) : व्यक्ति का मनोबल टूट जाता है । मस्तिष्क को अनुकूलन की जरूरत होती है ।
- (a) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों ग़लत हैं ।
- (b) कथन (A) ग़लत है, लेकिन कारण (R) सही है ।
- (c) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R), कथन (A) की ग़लत व्याख्या करता है ।
- (d) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है ।
Previously asked in CBSE board exam
2023 4/5/1 Q2
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 07:21 · grounding stimulus
Model Answer
(i) (b) चलने-फिरने की अक्षमता के कारण
(ii) (d) छोटी लड़की की सकारात्मक सोच व कोशिश को
(iii) (b) आकृति
(iv) (a) (क) और (ग)
(v) (d) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
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Explanation
- (i): गद्यांश स्पष्ट कहता है "बचपन से ही वह चलने-फिरने में अक्षम थी" — यही मूल कारण है। माता-पिता की बेबसी गौण कारण है।
- (ii): केवल प्रयास या केवल सोच नहीं — दोनों का संयोग उसे सफल बनाता है, इसलिए (d) सबसे सटीक है।
- (iii): यहाँ 'मुद्रा' का अर्थ दौड़ने की आकृति/भंगिमा है, न मुहर या धन।
- (iv): कथन (ख) गद्यांश में नहीं है; (घ) भी गलत है — गद्यांश में आराम नहीं, मस्तिष्क के अनुकूलन की बात है।
- (v): गद्यांश में दोनों बातें लिखी हैं — विफलता के बाद सोच स्थिर रखना कठिन होता है और इसके लिए मस्तिष्क के अनुकूलन की आवश्यकता होती है।
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