'मनुष्यता' कविता के अनुसार जो व्यक्ति दूसरों के लिए जीता और मरता है, वही मरकर अमर हो जाता है। ऐसे लोग —
कवि कहते हैं — "मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए।"
Source: मनुष्यता (कविता), chapter 3
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परीक्षक यहाँ देखते हैं कि छात्र कविता की मूल भावना — परोपकार, उदारता, सहानुभूति — को स्पष्ट करे और एक-दो पौराणिक उदाहरण (रंतिदेव, दधीचि, कर्ण) दे। कविता की कोई एक प्रासंगिक पंक्ति उद्धृत करने से अतिरिक्त प्रभाव पड़ता है। केवल स्वार्थ के लिए जीने वालों को कवि 'पशु-प्रवृत्ति' कहता है — यह contrast याद रखें।