'सुखिया सब संसार है, खायै अरु सोवै । दुखिया दास कबीर है, जागै अरु रोवै ।' — साखी के संदर्भ में कबीर के दुखी और जाग्रत होने का कारण लिखिए । क्या जागना भी दुख का कारण हो सकता है ? स्पष्ट कीजिए ।
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding rag
Model Answer
कबीर ईश्वर-प्रेम में इतने व्याकुल और विरही हैं कि उन्हें चैन नहीं मिलता। संसार के लोग सांसारिक सुखों में मग्न होकर खाते-सोते रहते हैं, जबकि कबीर परमात्मा की प्राप्ति के लिए जागकर रोते हैं — यही उनके दुख का कारण है।
हाँ, जागना भी दुख का कारण हो सकता है। जब कोई व्यक्ति आत्मज्ञान प्राप्त कर लेता है और संसार की माया-मोह की असलियत समझ लेता है, तो उसे ईश्वर से बिछड़े रहने की पीड़ा होती है। अज्ञान में सोया व्यक्ति सुखी रहता है, किंतु जाग्रत साधक विरह-वेदना में रोता है।
Explanation
- The key idea is विरह-वेदना (separation from God) — Kabir is awake spiritually but pained because he hasn't yet attained God.
- The contrast is between the world sleeping in ignorance/contentment vs. Kabir's conscious suffering.
- For the second part, examiners expect you to connect जागना = आत्मज्ञान → विरह का बोध → दुख. This is the philosophical depth expected.
- Keep both parts balanced since the question has two parts within 3 marks.