'अब कहाँ दूसरों के दुख से दुखी होने वाले' पाठ में लेखक की माँ उन्हें प्रकृति का ख्याल रखने के बारे में क्या-क्या बताती थीं ? इनके माध्यम से वह लेखक में किन जीवन-मूल्यों का विकास करना चाहती थी ?
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:16 · grounding rag
Model Answer
लेखक की माँ उन्हें प्रकृति का ख्याल रखने के लिए ये बातें बताती थीं:
- सूरज ढले पेड़ों से पत्ते मत तोड़ो, पेड़ रोएँगे।
- दीया-बत्ती के वक्त फूल मत तोड़ो, फूल बददुआ देते हैं।
- दरिया पर जाओ तो उसे सलाम करो, वह खुश होता है।
- कबूतरों और मुर्गे को परेशान मत करो।
इन बातों के माध्यम से माँ लेखक में करुणा, सहानुभूति, जीव-दया, पर्यावरण के प्रति सम्मान और सभी प्राणियों के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार के जीवन-मूल्यों का विकास करना चाहती थीं। वे सिखाना चाहती थीं कि प्रकृति के हर अंग का सम्मान करना मानवीय कर्तव्य है।
Source: 'अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले', Chapter 12
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Explanation
- CBSE examiners expect two parts: माँ की बताई बातें (कम से कम 3-4 बिंदु) + जीवन-मूल्य (2-3 मूल्य स्पष्ट रूप से नामित करें)।
- पाठ से सीधे उदाहरण देना ज़रूरी है — पत्ते, फूल, दरिया, कबूतर।
- जीवन-मूल्यों को सिर्फ गिनाएँ नहीं — एक पंक्ति में संदर्भ भी दें।
- 3 अंक के प्रश्न में बुलेट + निष्कर्ष वाक्य की संरचना अच्छी होती है।