पैसों से भरा बैग
एक दिन मैं विद्यालय से घर लौट रहा था। रास्ते में मुझे एक थैला पड़ा हुआ मिला। उठाकर देखा तो उसमें काफी पैसे और कुछ कागज़ात थे।
मेरे मन में लालच आया — "इतने पैसे मिल गए, कितनी चीज़ें खरीद सकता हूँ!" परंतु तभी माँ की बात याद आई — "ईमानदारी सबसे बड़ा धन है।"
मैंने थैले में रखे कागज़ात से उसके मालिक का पता लगाया। पास के मकान में वे बुजुर्ग सज्जन रहते थे। मैंने उनका बैग लौटा दिया। वे भावुक हो गए और बोले, "बेटा, तूने आज मुझ पर बड़ा उपकार किया।"
उस दिन मुझे सच्ची खुशी और संतोष मिला। ईमानदारी का पुरस्कार पैसों से कहीं बड़ा होता है।
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