'आत्मत्राण' कविता के माध्यम से कवि ने अपने अंतर्मन की भावना को किस प्रकार अभिव्यक्त किया है ?
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
'आत्मत्राण' कविता में कवि रवींद्रनाथ ठाकुर ने अपनी आंतरिक भावना को एक अनोखी प्रार्थना के रूप में व्यक्त किया है। कवि ईश्वर से विपदाओं को हटाने की प्रार्थना नहीं करता, बल्कि उन्हें सहन करने का साहस माँगता है। वह चाहता है कि दुखों पर विजय पाने की शक्ति मिले, भार हल्का न हो पर उसे निर्भय होकर वहन कर सके। सुख के दिनों में भी ईश्वर को न भूले और संकट में ईश्वर पर संदेह न करे। इस प्रकार कवि आत्मबल और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च मानता है।
Source: आत्मत्राण, chapter 7
---
Explanation
- परीक्षक 3-mark उत्तर में तीन मुख्य बिंदु देखते हैं: (1) कवि की प्रार्थना का स्वरूप — विपदा से बचाओ नहीं, बल्कि सहने की शक्ति दो; (2) दुख, हानि और एकाकीपन में भी मनोबल बनाए रखना; (3) सुख-दुख दोनों में ईश्वर पर अटूट विश्वास।
- 'आत्मत्राण' = आत्मा का उद्धार स्वयं करना — यह शीर्षक की सार्थकता भी दर्शाता है।
- पाठ्यपुस्तक की कविता की पंक्तियों को संक्षेप में उद्धृत करना उत्तर को पुष्ट करता है।