Q1. [5]
विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी,
मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी ।
हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए,
मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए ।
वही पशु-प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।।
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए :
- (i) कवि ने ऐसा क्यों कहा कि मृत्यु से नहीं डरना चाहिए ? [1]
- (A) मृत्यु से यश प्राप्त होता है
- (B) जन्म-मरण ईश्वर के हाथ में है
- (C) मृत्यु के बाद नया शरीर मिलता है
- (D) मृत्यु तो अवश्यंभावी है
- (ii) कवि कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहता है ? [1]
- (A) बिना किसी पीड़ा के हुई मृत्यु
- (B) अपनों के हित प्राप्त होने वाली मृत्यु
- (C) महान उद्देश्य के लिए मरने वाले की मृत्यु
- (D) स्वार्थ सिद्ध करते समय हुई मृत्यु
- (iii) कैसी मृत्यु व्यर्थ है ? [1]
- (A) देश हित प्राप्त होने वाली मृत्यु
- (B) जिस मृत्यु को याद न किया जाए
- (C) दूसरों के लिए संघर्ष करते हुए प्राप्त मृत्यु
- (D) मृत्यु के बाद जो हमेशा याद रहे
- (iv) पशु प्रवृत्ति क्या है ? [1]
- (A) अपने लिए जीना-खाना
- (B) दूसरों के लिए जीना-खाना
- (C) परोपकार का भाव रखना
- (D) दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना
- (v) कौन-सा/से वाक्य पद्यांश से मेल खाता है/खाते हैं ?
I. उदार मनुष्य दूसरों के लिए जीता-मरता है ।
II. पशु प्रवृत्ति को समझ के साथ अपनाना चाहिए ।
III. मनुष्य जीवन की सार्थकता परोपकार में है ।
IV. जीवन में कुछ पाने के लिए स्वार्थी होना पड़ता है । [1]
- (A) केवल I
- (B) II, IV
- (C) I, III
- (D) II, III
Previously asked in CBSE board exam
2024 4/4/1 Q7
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:14 · grounding stimulus+chapter
Model Answer
(i) (D) मृत्यु तो अवश्यंभावी है
(ii) (C) महान उद्देश्य के लिए मरने वाले की मृत्यु
(iii) (B) जिस मृत्यु को याद न किया जाए
(iv) (A) अपने लिए जीना-खाना
(v) (C) I, III
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Explanation
- (i): कवि कहता है "विचार लो कि मर्त्य हो" — अर्थात् तुम नश्वर हो, मृत्यु तो होनी ही है, इसलिए डरो मत। विकल्प (D) सही है।
- (ii): "यों मरो कि याद जो करें सभी" — जो मृत्यु सबको याद रहे, महान उद्देश्य के लिए हो, वही सुमृत्यु है। (C) सही है।
- (iii): "हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे" — जिसे याद न किया जाए, वह मृत्यु व्यर्थ है। (B) सही है।
- (iv): "वही पशु-प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे" — केवल अपने लिए जीना-खाना पशु-प्रवृत्ति है। (A) सही है।
- (v): कविता कहती है उदार मनुष्य दूसरों के लिए जीता-मरता है (I ✓) और जीवन की सार्थकता परोपकार में है (III ✓)। II और IV कविता के विरुद्ध हैं।
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