Q1. [5]
आज के दौर में जिसे देखो, वही दुखी, परेशान, हताश और उदास नज़र आता है । तमाम तरह की चिंताओं ने लोगों को घेर रखा है । कोई अपनी सेहत को लेकर परेशान रहता है, तो कोई काम-धंधे की मंदी या वेतन में कटौती से दुखी है । किसी को भविष्य की चिंता सता रही है तो कोई अपने मान-सम्मान के बारे में सोच कर मायूस महसूस कर रहा है । ज़ाहिर है, ऐसे में हर कोई खुशी के पीछे भाग रहा है । कई लोग सोचते हैं कि अमीर उद्योगपति या मोटा वेतन पाने वाले पेशेवर लोग खुश रहते हैं और ग़रीबी या आर्थिक विपन्नता ही खुशी से वंचित रहने की एकमात्र वजह है । लेकिन अगर धन से खुशी आती तो दुनिया में कई धनी लोग कुंठा और हताशा में जीवन नहीं जीते । खुशी पैसा नहीं, संतुष्टि का भाव है । यह पैसे से नहीं, हमारे प्रयासों से आती है और सबसे बड़ी बात है कि खुशी के पीछे भागने से खुशी नहीं मिलती । खुशी हमारे बिल्कुल आसपास होती है, जिसे हमें पहचानना और ग्रहण करना होता है ।
ज्यादातर लोग खुशी हमेशा बाहर खोजते हैं, जबकि यह उसी परिवार में उपलब्ध होती है, जिसका हम अहम हिस्सा होते हैं । मुश्किल यह है कि आजकल परिवार की परिभाषा सिकुड़ गई है । हम सिर्फ पति-पत्नी और अपने बच्चों को ही परिवार मानने लगे हैं जबकि भाई-बहन, देवर-देवरानी, जेठ-जेठानी, सास-ससुर, चाचा-मामा आदि सभी इस परिवार के सदस्य होते हैं । जब हम अपने परिवार के सदस्यों की खुशी में सच्चे मन से सम्मिलित होने लगते हैं और उनकी खुशी के लिए सक्रिय रहते हैं, तो खुशी स्वयं हमारे पास आती है । जब हम इस मानसिकता से व्यवहार करते हैं, तो परिवार के दूसरे सदस्य भी हमारे लिए ऐसा ही करते हैं । फिर खुशी न मिलने का कोई कारण नहीं हो सकता । इसलिए हम भले ही एक चारदीवारी में न रह कर अलग रहते हों, अलग खाना बनाते हैं, लेकिन मन से हम अपने संपूर्ण परिवार से जुड़े रह सकते हैं ।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
- (i) आजकल लोगों की चिंता के कारण हैं : [1]
- (A) अस्वस्थ होना, वेतन कटौती, व्यावसायिक मंदी
- (B) आर्थिक मंदी, अस्वस्थ होना, हताशा
- (C) उदासी, वेतन कटौती, व्यावसायिक मंदी
- (D) निराशा, आर्थिक मंदी, अस्वस्थ होना
- (ii) खुश रहने के लिए आवश्यक है : [1]
- (A) आर्थिक संपन्नता
- (B) प्रतिष्ठित होना
- (C) उद्योगपति होना
- (D) संतोषी होना
- (iii) प्रत्येक व्यक्ति खुशी के पीछे क्यों भाग रहा है ? [1]
- (A) आर्थिक विपन्नता के कारण
- (B) विभिन्न चिंताओं से घिरे होने के कारण
- (C) 'खुशी' से स्वस्थ रह पाएँगे, ऐसी सोच के कारण
- (D) 'खुशी' से पैसा आएगा, ऐसी सोच के कारण
- (iv) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए । उसके बाद दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर लिखिए :
कथन : हमें अपने परिवार की खुशियों में सच्चे मन से और सक्रियता से उपस्थित रहना चाहिए ।
कारण : यही प्रसन्न रहने का एकमात्र साधन है । [1]
- (A) कथन तथा कारण दोनों ग़लत हैं ।
- (B) कथन ग़लत है, लेकिन कारण सही है ।
- (C) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है ।
- (D) कथन सही है, लेकिन कारण उसकी ग़लत व्याख्या करता है ।
- (v) निम्नलिखित में से कौन-सा/से वाक्य गद्यांश से मेल खाते हैं ?
I. संपूर्ण परिवार से जुड़कर खुशी पाई जा सकती है ।
II. दादा-दादी, चाचा-चाची, बुआ आदि को मिलाकर परिवार मानना चाहिए ।
III. दुनिया में सभी धनी कुंठाग्रस्त और हताश नहीं हैं ।
IV. तथाकथित खुशी को धन से नहीं खरीदा जा सकता । [1]
- (A) केवल I
- (B) II और III
- (C) केवल IV
- (D) I, II, IV
Previously asked in CBSE board exam
2024 4/4/1 Q1
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 07:20 · grounding stimulus
Model Answer
(i) (A) अस्वस्थ होना, वेतन कटौती, व्यावसायिक मंदी
(ii) (D) संतोषी होना
(iii) (B) विभिन्न चिंताओं से घिरे होने के कारण
(iv) (D) कथन सही है, लेकिन कारण उसकी ग़लत व्याख्या करता है ।
(v) (D) I, II, IV
Source: अपठित गद्यांश — खुशी और परिवार
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Explanation
- (i) गद्यांश में सेहत, काम-धंधे की मंदी और वेतन कटौती — तीनों चिंताओं का स्पष्ट उल्लेख है। विकल्प (A) इन्हीं तीनों को सटीक रूप से प्रस्तुत करता है।
- (ii) गद्यांश की पंक्ति — "खुशी पैसा नहीं, संतुष्टि का भाव है" — सीधे (D) की ओर इशारा करती है।
- (iii) गद्यांश कहता है — "तमाम तरह की चिंताओं ने लोगों को घेर रखा है… ऐसे में हर कोई खुशी के पीछे भाग रहा है।" अतः (B) सही है।
- (iv) कथन सही है (परिवार की खुशियों में सहभागी रहना अच्छा है), परंतु कारण गलत है क्योंकि गद्यांश इसे "एकमात्र साधन" नहीं कहता — प्रयास और संतोष भी आवश्यक बताए गए हैं।
- (v) कथन I और II गद्यांश से सीधे मेल खाते हैं। कथन IV भी सही है क्योंकि गद्यांश कहता है धन से खुशी नहीं आती। कथन III गलत है क्योंकि गद्यांश कहता है "कई धनी लोग कुंठा में जीते हैं।"
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