शैलेंद्र फ़िल्म की असफलता के खतरों को पहले से जानते थे फिर भी उन्होंने 'तीसरी कसम' फ़िल्म क्यों बनाई ? 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ के आधार पर उत्तर लिखिए ।
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:16 · grounding rag
Model Answer
शैलेंद्र एक आदर्शवादी कवि-हृदय थे जिन्हें धन-यश की नहीं, बल्कि आत्म-संतुष्टि की चाह थी। वे फणीश्वर नाथ रेणु की इस संवेदनशील कृति को परदे पर उतारकर दर्शकों की रुचि का परिष्कार करना चाहते थे। उनके लिए यह फ़िल्म व्यापार नहीं, एक काव्यात्मक अभिव्यक्ति थी।
Source: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र, Chapter 11
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Explanation
- Examiner looks for two key points: (1) शैलेंद्र की आदर्शवादी/कवि-हृदय प्रवृत्ति और आत्म-संतुष्टि की चाह, (2) दर्शकों की रुचि-परिष्कार का उद्देश्य।
- Do not write a long essay — 40–50 words are enough for 2 marks.
- Use textbook phrases like "आत्म-संतुष्टि" and "रुचि का परिष्कार" to score full marks.