Code: WYEGWHQuestions: 14Maximum Marks: 38Generated: 2026-06-15 13:05
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SourcePrevious-year board
SubjectHindi — Course B (085)
Lessonsकबीर – साखी
Year2022-2026
Questions selected14
Composition — Types: 9 Short · 3 reading_comprehension · 2 MCQ
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Q1. [2]
कबीर के, निंदक को पास रखने वाले विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं और क्यों?
Previously asked in: 2025 4/4/1 Q10 (i)
Q2. [2]
कबीर की साखी के अनुसार उनके रुदन का कारण स्पष्ट कीजिए।
Previously asked in: 2025 4/3/1 Q10 (क)
Q3. [2]
साधारणत: निंदक किसी को पसंद नहीं होते फिर भी कबीरदासजी ने निंदकों को अपने पास रखने की सलाह क्यों दी है ?
Previously asked in: 2025 4/1/1 Q10 (क)
Q4. [2]
ईश्वर की सर्वव्यापकता का उल्लेख करने के लिए कबीर ने 'साखी' में क्या उदाहरण दिया है ? इसके माध्यम से कवि ने क्या स्पष्ट किया है ?
Previously asked in: 2026 4/2/1 Q8 (iii)
Q5. [3]
'सुखिया सब संसार है, खायै अरु सोवै । दुखिया दास कबीर है, जागै अरु रोवै ।' — साखी के संदर्भ में कबीर के दुखी और जाग्रत होने का कारण लिखिए । क्या जागना भी दुख का कारण हो सकता है ? स्पष्ट कीजिए ।
Previously asked in: 2023 4/2/1 Q12 (क)
Q6. [1]
पद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उपयुक्त विकल्प को चुनकर लिखिए : कबीर ने कस्तूरी मृग के उदाहरण से क्या समझाया है ?
- (A) कस्तूरी मृग जंगल में कस्तूरी खोजता है ।
- (B) हृदय में आत्मा के रूप में ही परमात्मा हैं ।
- (C) हिरन की नाभि में ही कस्तूरी पाई जाती है ।
- (D) जगह-जगह खोजने से परमात्मा मिल जाते हैं ।
Previously asked in: 2024 4/5/1 Q8 (i)
Q7. [1]
पद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उपयुक्त विकल्प को चुनकर लिखिए : कबीर के अनुसार मीठी बोली का क्या प्रभाव होता है ?
I. हमारा शरीर शीतल होता है ।
II. बोली में अहं का भाव आता है ।
III. हमारा काम सरलतापूर्वक हो जाता है ।
IV. सुनने वाले को सुखानुभूति होती है ।
- (A) I, II
- (B) II, III
- (C) III, IV
- (D) I, IV
Previously asked in: 2024 4/4/1 Q8 (i)
Q8. [5]
कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढ़ै बन माँहि ।
ऐसैं घटि घटि राँम है, दुनियाँ देखै नाँहि ।।
बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ ।
राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होई ।।
निम्नलिखित काव्यांश (दोहों) को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कर लिखिए :
- (i) 'बौरा' किसे कहा गया है ? [1]
- (A) जो परमात्मा के प्रेम में डूबा है ।
- (B) जो संसार के प्रेम में डूबा है ।
- (C) जिसे किसी साँप ने डँस लिया हो ।
- (D) जिसे सांसारिक प्रेम में निराशा मिली हो ।
- (ii) 'ऐसैं घटि घटि राँम है' में 'घटि घटि' का गलत अर्थ है – [1]
- (A) जीव मात्र
- (B) कण-कण
- (C) हर जगह
- (D) हर घड़ी
- (iii) 'विरह भुवंगम तन बसै' का भाव है – [1]
- (A) भुजंग का तन में वास होना
- (B) भुजंग से विरह की अनुभूति होना
- (C) परमात्मा का तन से विरह होना
- (D) परमात्मा से विरह की अनुभूति होना
- (iv) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : परमात्मा प्रत्येक प्राणी के हृदय में निवास करता है ।
कारण : सांसारिक मोह-माया में लिप्त प्राणी इस सत्य से सुपरिचित होता है । [1]
- (A) कथन और कारण दोनों गलत हैं ।
- (B) कथन गलत है, लेकिन कारण सही है ।
- (C) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की गलत व्याख्या करता है ।
- (D) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है ।
- (v) 'राम वियोगी ना जिवै' का आशय है – [1]
- (A) राम का वियोगी स्वयं मृत्यु को प्राप्त हो जाता है ।
- (B) राम का वियोगी स्वयं मृत्यु का वरण कर लेता है ।
- (C) राम का वियोगी सांसारिक मोह-माया से मुक्त हो जाता है ।
- (D) राम से विरही व्यक्ति की स्थिति विक्षिप्तों जैसी हो जाती है ।
Previously asked in: 2026 4/5/1 Q9
Q9. [3]
'साखी' पाठ के आधार पर 'घर' की प्रतीकात्मकता स्पष्ट करते हुए लिखिए कि कबीर अपने बताए मार्ग पर चलने वालों का घर क्यों जलाना चाहते हैं ?
Previously asked in: 2023 4/1/1 Q12 (क)
Q10. [5]
सुखिया सब संसार है, खायै अरू सोवै ।
दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै ।।
बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ ।
राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ ।।
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
- (i) पहले दोहे में 'सोना' और 'जागना' प्रतीकार्थ है – [1]
- A अज्ञानता और ज्ञान का
- B निष्क्रियता और सक्रियता का
- C अचेतना और चेतनता का
- D निर्जीवता और सजीवता का
- (ii) कबीर दुखी हैं क्योंकि वे – [1]
- A एकाकी जीवन व्यतीत कर रहे हैं ।
- B ईश्वर से वियोग के कारण व्यथित हैं ।
- C सांसारिक सुखों का भोग नहीं कर पा रहे हैं ।
- D ईश्वरीय सत्य से लोगों को परिचित नहीं करवा पा रहे हैं ।
- (iii) 'मंत्र न लगना' का आशय है – [1]
- A मंत्रों का निष्फल होना
- B पूजा-पाठ का काम न आना
- C कोई उपाय काम न आना
- D मंत्रोच्चार की विधि न जानना
- (iv) राम वियोगी व्यक्ति की तुलना किससे की गई है ? [1]
- A विक्षिप्त व्यक्ति से
- B विरह रूपी व्यक्ति से
- C विष युक्त सर्प के तन से
- D विरह रूपी सर्प से ग्रसित व्यक्ति से
- (v) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए । उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए : कथन : सांसारिक मनुष्य सुख-पूर्वक जीवन यापन कर रहे हैं । कारण : वह भौतिक सुखों को ही सच्चा सुख मानते हैं । [1]
- A कथन तथा कारण दोनों गलत हैं ।
- B कारण सही है, किंतु कथन गलत है ।
- C कथन सही है, लेकिन कारण कथन की गलत व्याख्या करता है ।
- D कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है ।
Previously asked in: 2024 4/3/1 Q7
Q11. [5]
कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढ़ै बन माँहि ।
ऐसैं घटि घटि राँम है, दुनियाँ देखै नाँहिं ।।
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि ।
सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि ।।
निम्नलिखित पठित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
- (i) 'कस्तूरी कुंडलि बसै ...' दोहे में किसका वर्णन किया गया है ? [1]
- A कस्तूरी ढूँढ़ने वाले मृग का
- B सांसारिकता में लीन मानव का
- C अपनी ही विशेषता से अनजान मनुष्य का
- D ईश्वर की सर्वव्यापकता का
- (ii) 'जब मैं था तब हरि नहीं' पंक्ति में 'मैं' से अभिप्राय है – [1]
- A अहंकार की भावना
- B स्वार्थ की भावना
- C सांसारिक माया-मोह
- D स्वयं कवि
- (iii) 'जब मैं था तब हरि नहीं' दोहे के अनुसार हृदय में ईश्वर का निवास कब तक असंभव है ? [1]
- A जब तक सच्चे हृदय से उसे याद न किया जाए ।
- B जब तक सांसारिक विषय-वासनाओं को न छोड़ा जाए ।
- C जब तक अहंकारपूर्ण व्यवहार का नाश न किया जाए ।
- D जब तक सच्चे हृदय से उसकी सेवा न की जाए ।
- (iv) 'जब दीपक देख्या माँहि' – पंक्ति में 'दीपक' प्रतीकार्थ है – [1]
- A प्रभु प्रेम के प्रकाश का
- B रोशनी के साधन का
- C प्रकाश का
- D संपन्नता का
- (v) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए :
कथन : ईश्वर सृष्टि के कण-कण में निवास करते हैं पर हम उन्हें देख नहीं पाते ।
कारण : मनुष्य के पास दिव्य-दृष्टि नहीं है । [1]
- A कथन तथा कारण दोनों गलत हैं ।
- B कथन गलत है, लेकिन कारण सही है ।
- C कथन सही है, लेकिन कारण उसकी गलत व्याख्या करता है ।
- D कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है ।
Previously asked in: 2024 4/2/1 Q7
Q12. [2]
'कबीर' की साखियों में कौन-कौन से जीवन-मूल्य उभरते हैं ?
Previously asked in: 2025 4/6/1 Q10 (I)
Q13. [2]
'साखी' में कबीर ने प्रभु प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा किसे और क्यों बताया है ?
Previously asked in: 2026 4/4/1 Q10 (ii)
Q14. [3]
'साखी' शब्द का अर्थ स्पष्ट करते हुए अपने पाठ्यक्रम में संकलित कबीर की साखियों का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए ।
Previously asked in: 2023 4/5/1 Q12 (क)
Code: WYEGWHQuestions: 14Maximum Marks: 38Generated: 2026-06-15 13:05
Q1. [2]
कबीर के, निंदक को पास रखने वाले विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं और क्यों?
Previously asked in: 2025 4/4/1 Q10 (i)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
मैं कबीर के इस विचार से पूर्णतः सहमत हूँ। निंदक हमारी कमियाँ बताता है, जिससे हम अपना सुधार कर सकते हैं। बिना साबुन और पानी के वह हमारे स्वभाव को निर्मल बना देता है। यह आत्म-सुधार का सबसे सरल और निःशुल्क उपाय है।
Explanation
- यह प्रश्न कबीर की साखी पर आधारित है जिसमें कहा गया है — "निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।"
- उत्तर में सहमति + कारण दोनों लिखना अनिवार्य है।
- निंदक को आलोचक के रूप में सकारात्मक दृष्टि से प्रस्तुत करें।
- 2 अंक के लिए एक स्पष्ट मत और एक-दो ठोस कारण पर्याप्त हैं।
Q2. [2]
कबीर की साखी के अनुसार उनके रुदन का कारण स्पष्ट कीजिए।
Previously asked in: 2025 4/3/1 Q10 (क)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
कबीर कहते हैं कि वे इसलिए रोते हैं क्योंकि उन्हें अपने प्रियतम (ईश्वर) से बिछड़ने का दुख है। वे उस वियोग में तड़पते हैं। साथ ही, वे इस बात पर भी दुखी हैं कि संसार में लोग ईश्वर को भूलकर माया-मोह में लिप्त हैं और उन्हें अपने जीवन का असली उद्देश्य नहीं दिखता।
Explanation
- प्रश्न कबीर की साखी पर आधारित है। दिए गए स्रोत अंशों में कबीर की साखी का पाठ नहीं है, इसलिए उत्तर पाठ्यक्रम की सामान्य जानकारी के आधार पर दिया गया है।
- परीक्षा में कबीर के रुदन के दो मुख्य कारण लिखें: (1) ईश्वर से वियोग का दुख, और (2) संसार की माया-मोह में डूबी दशा पर पीड़ा।
- उत्तर सरल, सटीक और पाठ से जुड़ा होना चाहिए।
Q3. [2]
साधारणत: निंदक किसी को पसंद नहीं होते फिर भी कबीरदासजी ने निंदकों को अपने पास रखने की सलाह क्यों दी है ?
Previously asked in: 2025 4/1/1 Q10 (क)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
कबीरदासजी ने निंदकों को पास रखने की सलाह इसलिए दी क्योंकि निंदक हमारी कमियाँ और बुराइयाँ हमारे सामने लाता है। इससे हम अपना सुधार कर सकते हैं। निंदक बिना साबुन-पानी के हमारे स्वभाव को निर्मल बना देता है — यानी वह हमारा सच्चा हितैषी है।
Explanation
- यह प्रश्न कबीर की साखी पर आधारित है: "निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय..."
- परीक्षक देखते हैं कि छात्र ने निंदक की उपयोगिता (आत्मसुधार) स्पष्ट की है या नहीं।
- "साबुन-पानी" वाला भाव लिखना अतिरिक्त अंक दिला सकता है।
- उत्तर 2 अंक का है, इसलिए 2 मुख्य बिंदु पर्याप्त हैं — विस्तार न करें।
Q4. [2]
ईश्वर की सर्वव्यापकता का उल्लेख करने के लिए कबीर ने 'साखी' में क्या उदाहरण दिया है ? इसके माध्यम से कवि ने क्या स्पष्ट किया है ?
Previously asked in: 2026 4/2/1 Q8 (iii)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
कबीर ने 'साखी' में कस्तूरी मृग का उदाहरण दिया है — जैसे मृग की नाभि में ही कस्तूरी होती है, फिर भी वह उसे वन-वन ढूँढता है। इसके माध्यम से कवि ने स्पष्ट किया है कि ईश्वर हमारे भीतर ही विद्यमान है, बाहर खोजने की आवश्यकता नहीं।
Explanation
- यह साखी कबीर के अध्याय से संबंधित है। परीक्षा में उदाहरण + संदेश दोनों लिखना ज़रूरी है।
- "कस्तूरी कुंडल बसै" वाली साखी का सार यही है: ईश्वर बाहर नहीं, अपने अंदर है।
- 2 अंक के लिए: 1 अंक उदाहरण के लिए + 1 अंक कवि के संदेश के लिए।
Q5. [3]
'सुखिया सब संसार है, खायै अरु सोवै । दुखिया दास कबीर है, जागै अरु रोवै ।' — साखी के संदर्भ में कबीर के दुखी और जाग्रत होने का कारण लिखिए । क्या जागना भी दुख का कारण हो सकता है ? स्पष्ट कीजिए ।
Previously asked in: 2023 4/2/1 Q12 (क)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding rag
Model Answer
कबीर ईश्वर-प्रेम में इतने व्याकुल और विरही हैं कि उन्हें चैन नहीं मिलता। संसार के लोग सांसारिक सुखों में मग्न होकर खाते-सोते रहते हैं, जबकि कबीर परमात्मा की प्राप्ति के लिए जागकर रोते हैं — यही उनके दुख का कारण है।
हाँ, जागना भी दुख का कारण हो सकता है। जब कोई व्यक्ति आत्मज्ञान प्राप्त कर लेता है और संसार की माया-मोह की असलियत समझ लेता है, तो उसे ईश्वर से बिछड़े रहने की पीड़ा होती है। अज्ञान में सोया व्यक्ति सुखी रहता है, किंतु जाग्रत साधक विरह-वेदना में रोता है।
Explanation
- The key idea is विरह-वेदना (separation from God) — Kabir is awake spiritually but pained because he hasn't yet attained God.
- The contrast is between the world sleeping in ignorance/contentment vs. Kabir's conscious suffering.
- For the second part, examiners expect you to connect जागना = आत्मज्ञान → विरह का बोध → दुख. This is the philosophical depth expected.
- Keep both parts balanced since the question has two parts within 3 marks.
Q6. [1]
पद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उपयुक्त विकल्प को चुनकर लिखिए : कबीर ने कस्तूरी मृग के उदाहरण से क्या समझाया है ?
- (A) कस्तूरी मृग जंगल में कस्तूरी खोजता है ।
- (B) हृदय में आत्मा के रूप में ही परमात्मा हैं ।
- (C) हिरन की नाभि में ही कस्तूरी पाई जाती है ।
- (D) जगह-जगह खोजने से परमात्मा मिल जाते हैं ।
Previously asked in: 2024 4/5/1 Q8 (i)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding rag
Model Answer
(B) हृदय में आत्मा के रूप में ही परमात्मा हैं।
कबीर ने कस्तूरी मृग के उदाहरण से समझाया है कि जैसे हिरण कस्तूरी को बाहर खोजता है जबकि वह उसकी नाभि में ही होती है, उसी प्रकार परमात्मा हमारे हृदय में ही विद्यमान हैं।
---
Explanation
- कबीर के इस दोहे का केंद्रीय भाव है — ईश्वर बाहर नहीं, भीतर है।
- MCQ में विकल्प (B) सबसे सटीक है क्योंकि यह कबीर के आध्यात्मिक संदेश को व्यक्त करता है।
- विकल्प (A) और (C) केवल तथ्य हैं, संदेश नहीं; (D) गलत अर्थ देता है।
- 1 अंक के प्रश्न में सही विकल्प लिखना अनिवार्य है; एक-दो पंक्तियों में कारण देना वैकल्पिक लेकिन अच्छा अभ्यास है।
Q7. [1]
पद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उपयुक्त विकल्प को चुनकर लिखिए : कबीर के अनुसार मीठी बोली का क्या प्रभाव होता है ?
I. हमारा शरीर शीतल होता है ।
II. बोली में अहं का भाव आता है ।
III. हमारा काम सरलतापूर्वक हो जाता है ।
IV. सुनने वाले को सुखानुभूति होती है ।
- (A) I, II
- (B) II, III
- (C) III, IV
- (D) I, IV
Previously asked in: 2024 4/4/1 Q8 (i)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding rag
Model Answer
(D) I, IV — कबीर के अनुसार मीठी बोली बोलने से हमारा शरीर शीतल होता है और सुनने वाले को सुखानुभूति होती है।
Explanation
यह कबीर के दोहे पर आधारित है: "ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय / औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय।" मीठी वाणी से बोलने वाले का शरीर/मन शीतल होता है (I) और सुनने वाले को सुख मिलता है (IV)। अहं का भाव (II) तो मीठी बोली से जाता है, आता नहीं।
Q8. [5]
कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढ़ै बन माँहि ।
ऐसैं घटि घटि राँम है, दुनियाँ देखै नाँहि ।।
बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ ।
राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होई ।।
निम्नलिखित काव्यांश (दोहों) को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कर लिखिए :
- (i) 'बौरा' किसे कहा गया है ? [1]
- (A) जो परमात्मा के प्रेम में डूबा है ।
- (B) जो संसार के प्रेम में डूबा है ।
- (C) जिसे किसी साँप ने डँस लिया हो ।
- (D) जिसे सांसारिक प्रेम में निराशा मिली हो ।
- (ii) 'ऐसैं घटि घटि राँम है' में 'घटि घटि' का गलत अर्थ है – [1]
- (A) जीव मात्र
- (B) कण-कण
- (C) हर जगह
- (D) हर घड़ी
- (iii) 'विरह भुवंगम तन बसै' का भाव है – [1]
- (A) भुजंग का तन में वास होना
- (B) भुजंग से विरह की अनुभूति होना
- (C) परमात्मा का तन से विरह होना
- (D) परमात्मा से विरह की अनुभूति होना
- (iv) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : परमात्मा प्रत्येक प्राणी के हृदय में निवास करता है ।
कारण : सांसारिक मोह-माया में लिप्त प्राणी इस सत्य से सुपरिचित होता है । [1]
- (A) कथन और कारण दोनों गलत हैं ।
- (B) कथन गलत है, लेकिन कारण सही है ।
- (C) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की गलत व्याख्या करता है ।
- (D) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है ।
- (v) 'राम वियोगी ना जिवै' का आशय है – [1]
- (A) राम का वियोगी स्वयं मृत्यु को प्राप्त हो जाता है ।
- (B) राम का वियोगी स्वयं मृत्यु का वरण कर लेता है ।
- (C) राम का वियोगी सांसारिक मोह-माया से मुक्त हो जाता है ।
- (D) राम से विरही व्यक्ति की स्थिति विक्षिप्तों जैसी हो जाती है ।
Previously asked in: 2026 4/5/1 Q9
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding stimulus+chapter
Model Answer
(i) (A) जो परमात्मा के प्रेम में डूबा है।
(ii) (D) हर घड़ी
(iii) (D) परमात्मा से विरह की अनुभूति होना
(iv) (C) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की गलत व्याख्या करता है।
(कथन सही है — परमात्मा हर प्राणी के हृदय में है। परंतु कारण गलत है क्योंकि सांसारिक मोह-माया में लिप्त प्राणी इस सत्य से अनजान रहता है, सुपरिचित नहीं।)
(v) (D) राम से विरही व्यक्ति की स्थिति विक्षिप्तों जैसी हो जाती है।
(दोहे के अनुसार राम-वियोगी या तो जीता नहीं, और यदि जीता है तो बौरा — अर्थात् पागल — हो जाता है।)
Source: साखी – कबीर, स्पर्श (काव्य खंड)
---
Explanation
- (i): दूसरे दोहे की अंतिम पंक्ति — "जिवै तो बौरा होई" — स्पष्ट करती है कि राम-वियोग में पागल हो जाने वाले को 'बौरा' कहा गया है।
- (ii): 'घटि घटि' का अर्थ है जीव मात्र / कण-कण / हर जगह। "हर घड़ी" (समय-सूचक अर्थ) यहाँ सही नहीं बैठता — यही गलत अर्थ है।
- (iii): 'भुवंगम' (सर्प) यहाँ विरह का प्रतीक है, न कि असली साँप। भाव है — परमात्मा के विरह की पीड़ा तन में बसती है।
- (iv): परीक्षक 'कारण' की जाँच करें — कबीर कहते हैं दुनिया देखती नहीं, अर्थात् माया में डूबा जीव अनजान रहता है। अतः कारण गलत है।
- (v): विकल्प (A) व (B) में अंतर है — (A) स्वाभाविक मृत्यु, (B) स्वेच्छा से। दोहा न तो मृत्यु की बात करता है, बल्कि विक्षिप्त (पागल) अवस्था की। अतः (D) सर्वाधिक उपयुक्त है।
Q9. [3]
'साखी' पाठ के आधार पर 'घर' की प्रतीकात्मकता स्पष्ट करते हुए लिखिए कि कबीर अपने बताए मार्ग पर चलने वालों का घर क्यों जलाना चाहते हैं ?
Previously asked in: 2023 4/1/1 Q12 (क)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
'साखी' में कबीर ने 'घर' को मोह-माया, अहंकार और सांसारिक आसक्ति का प्रतीक माना है। यह वह 'घर' नहीं जहाँ हम रहते हैं, बल्कि मन का वह कोना है जहाँ लोभ, ममता और अहंकार का वास होता है।
कबीर चाहते हैं कि उनके मार्ग पर चलने वाला साधक इन विकारों को पूरी तरह नष्ट कर दे — अर्थात् भीतरी मोह-माया रूपी 'घर' को जला दे। जब तक यह घर (अहंकार व आसक्ति) जीवित है, तब तक ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं। इसीलिए कबीर कहते हैं — जो मेरे साथ चलना चाहे, वह अपना यह घर (मोह का बंधन) जलाकर चले।
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Explanation
- 'घर' = मोह-माया, अहंकार — यही प्रतीकार्थ परीक्षक देखते हैं।
- उत्तर में दो बातें स्पष्ट होनी चाहिए: (1) घर की प्रतीकात्मकता, (2) कबीर क्यों इसे जलाना चाहते हैं।
- 'साखी' अध्याय 1 की मुख्य थीम — वैराग्य, निर्मोह और ईश्वर-प्रेम — को उत्तर में दर्शाएँ।
- सीधे और सरल हिंदी में लिखें; उद्धरण दें तो साखी की पंक्ति जोड़ सकते हैं (जैसे "जो घर जारे आपना चलै हमारे साथ")।
Q10. [5]
सुखिया सब संसार है, खायै अरू सोवै ।
दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै ।।
बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ ।
राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ ।।
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
- (i) पहले दोहे में 'सोना' और 'जागना' प्रतीकार्थ है – [1]
- A अज्ञानता और ज्ञान का
- B निष्क्रियता और सक्रियता का
- C अचेतना और चेतनता का
- D निर्जीवता और सजीवता का
- (ii) कबीर दुखी हैं क्योंकि वे – [1]
- A एकाकी जीवन व्यतीत कर रहे हैं ।
- B ईश्वर से वियोग के कारण व्यथित हैं ।
- C सांसारिक सुखों का भोग नहीं कर पा रहे हैं ।
- D ईश्वरीय सत्य से लोगों को परिचित नहीं करवा पा रहे हैं ।
- (iii) 'मंत्र न लगना' का आशय है – [1]
- A मंत्रों का निष्फल होना
- B पूजा-पाठ का काम न आना
- C कोई उपाय काम न आना
- D मंत्रोच्चार की विधि न जानना
- (iv) राम वियोगी व्यक्ति की तुलना किससे की गई है ? [1]
- A विक्षिप्त व्यक्ति से
- B विरह रूपी व्यक्ति से
- C विष युक्त सर्प के तन से
- D विरह रूपी सर्प से ग्रसित व्यक्ति से
- (v) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए । उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए : कथन : सांसारिक मनुष्य सुख-पूर्वक जीवन यापन कर रहे हैं । कारण : वह भौतिक सुखों को ही सच्चा सुख मानते हैं । [1]
- A कथन तथा कारण दोनों गलत हैं ।
- B कारण सही है, किंतु कथन गलत है ।
- C कथन सही है, लेकिन कारण कथन की गलत व्याख्या करता है ।
- D कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है ।
Previously asked in: 2024 4/3/1 Q7
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding stimulus+chapter
Model Answer
(i) A — अज्ञानता और ज्ञान का
(ii) B — ईश्वर से वियोग के कारण व्यथित हैं ।
(iii) C — कोई उपाय काम न आना
(iv) D — विरह रूपी सर्प से ग्रसित व्यक्ति से
(v) D — कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है ।
Source: कबीर (साखी), स्पर्श (पद्य खंड)
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Explanation
- (i) 'सोना' = अज्ञान/मोह की नींद में डूबे रहना; 'जागना' = ईश्वर-चिंतन में सजग रहना — यही कबीर का प्रतीकार्थ है।
- (ii) कबीर राम (ईश्वर) के वियोग में रोते और जागते हैं — यही उनके दुःख का मूल कारण है।
- (iii) 'मंत्र न लागै' = विरह-रूपी सर्प के लिए कोई भी उपाय/झाड़-फूँक काम नहीं आती।
- (iv) दूसरे दोहे में 'बिरह भुवंगम' (विरह-सर्प) से डसे हुए राम-वियोगी व्यक्ति की बात है, जो या तो जीवित नहीं रहता या पागल हो जाता है।
- (v) पहले दोहे में स्पष्ट है कि संसारी लोग खाने-सोने (भौतिक सुखों) में लीन हैं इसीलिए सुखी हैं — कथन और कारण दोनों सटीक हैं।
Q11. [5]
कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढ़ै बन माँहि ।
ऐसैं घटि घटि राँम है, दुनियाँ देखै नाँहिं ।।
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि ।
सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि ।।
निम्नलिखित पठित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
- (i) 'कस्तूरी कुंडलि बसै ...' दोहे में किसका वर्णन किया गया है ? [1]
- A कस्तूरी ढूँढ़ने वाले मृग का
- B सांसारिकता में लीन मानव का
- C अपनी ही विशेषता से अनजान मनुष्य का
- D ईश्वर की सर्वव्यापकता का
- (ii) 'जब मैं था तब हरि नहीं' पंक्ति में 'मैं' से अभिप्राय है – [1]
- A अहंकार की भावना
- B स्वार्थ की भावना
- C सांसारिक माया-मोह
- D स्वयं कवि
- (iii) 'जब मैं था तब हरि नहीं' दोहे के अनुसार हृदय में ईश्वर का निवास कब तक असंभव है ? [1]
- A जब तक सच्चे हृदय से उसे याद न किया जाए ।
- B जब तक सांसारिक विषय-वासनाओं को न छोड़ा जाए ।
- C जब तक अहंकारपूर्ण व्यवहार का नाश न किया जाए ।
- D जब तक सच्चे हृदय से उसकी सेवा न की जाए ।
- (iv) 'जब दीपक देख्या माँहि' – पंक्ति में 'दीपक' प्रतीकार्थ है – [1]
- A प्रभु प्रेम के प्रकाश का
- B रोशनी के साधन का
- C प्रकाश का
- D संपन्नता का
- (v) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए :
कथन : ईश्वर सृष्टि के कण-कण में निवास करते हैं पर हम उन्हें देख नहीं पाते ।
कारण : मनुष्य के पास दिव्य-दृष्टि नहीं है । [1]
- A कथन तथा कारण दोनों गलत हैं ।
- B कथन गलत है, लेकिन कारण सही है ।
- C कथन सही है, लेकिन कारण उसकी गलत व्याख्या करता है ।
- D कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है ।
Previously asked in: 2024 4/2/1 Q7
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding stimulus+chapter
Model Answer
(i) D — ईश्वर की सर्वव्यापकता का
(ii) A — अहंकार की भावना
(iii) C — जब तक अहंकारपूर्ण व्यवहार का नाश न किया जाए ।
(iv) A — प्रभु प्रेम के प्रकाश का
(v) C — कथन सही है, लेकिन कारण उसकी गलत व्याख्या करता है ।
Source: साखी – कबीर, स्पर्श (काव्य खंड)
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Explanation
- (i) दोहे में मुख्य संदेश ईश्वर की सर्वव्यापकता है — राम (ईश्वर) घट-घट में बसे हैं, पर दुनिया देखती नहीं।
- (ii) 'मैं' = अहंकार। जब तक 'मैं' (अहं) है, तब तक हरि नहीं मिलते — यह कबीर का केंद्रीय भाव है।
- (iii) दोहे के अनुसार 'मैं' (अहंकार) के रहते हरि नहीं आते — इसलिए अहंकार का नाश आवश्यक है।
- (iv) 'दीपक' यहाँ ज्ञान/प्रभु प्रेम के प्रकाश का प्रतीक है जो अज्ञान रूपी अँधियारा मिटाता है।
- (v) कथन सही है (ईश्वर कण-कण में है), लेकिन कारण गलत है — कबीर के अनुसार अहंकार व माया के कारण हम ईश्वर को नहीं देख पाते, 'दिव्य-दृष्टि के अभाव' के कारण नहीं।
Q12. [2]
'कबीर' की साखियों में कौन-कौन से जीवन-मूल्य उभरते हैं ?
Previously asked in: 2025 4/6/1 Q10 (I)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
कबीर की साखियों में निम्नलिखित जीवन-मूल्य उभरते हैं:
- मीठी वाणी — मधुर बोली से दूसरों को सुख देना और स्वयं भी शीतलता पाना।
- ईश्वर-प्रेम — सच्चे मन से परमात्मा की भक्ति करना।
- अहंकार-त्याग — घमंड छोड़कर विनम्र रहना।
- सांप्रदायिक सद्भाव — जाति-धर्म के भेद से ऊपर उठकर मानवता को महत्त्व देना।
Explanation
- The passages hint at two key themes in Kabir's Sakhis — मीठी वाणी and ईश्वर प्रेम (mentioned in the परियोजना कार्य of Chapter 1). The remaining points (अहंकार-त्याग, सांप्रदायिक सद्भाव) are standard textbook content for Kabir's Sakhis (Sparsh, Chapter 1).
- Examiners expect 2–3 values named clearly. Bullet/point format works well here for a 2-mark answer.
- Do not write long explanations; just name the values with a brief phrase each.
Q13. [2]
'साखी' में कबीर ने प्रभु प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा किसे और क्यों बताया है ?
Previously asked in: 2026 4/4/1 Q10 (ii)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding rag
Model Answer
कबीर ने 'साखी' में मन को प्रभु प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा बताया है। मन चंचल और अस्थिर होता है, जो मनुष्य को सांसारिक विषय-वासनाओं में उलझाए रखता है। जब तक मन वश में न हो, ईश्वर से सच्चा मिलन संभव नहीं होता।
Explanation
- CBSE परीक्षा में कबीर की साखी से यह एक प्रमुख प्रश्न है।
- उत्तर में क्या (मन) और क्यों (चंचलता/सांसारिक आसक्ति) — दोनों बिंदु अवश्य लिखें, तभी दोनों अंक मिलेंगे।
- नोट: दिए गए source passages में साखी का मूल पाठ उपलब्ध नहीं है, इसलिए यह उत्तर कबीर की साखी के पाठ्यक्रम-सम्मत सामान्य ज्ञान पर आधारित है।
Q14. [3]
'साखी' शब्द का अर्थ स्पष्ट करते हुए अपने पाठ्यक्रम में संकलित कबीर की साखियों का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए ।
Previously asked in: 2023 4/5/1 Q12 (क)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
'साखी' शब्द का अर्थ:
'साखी' संस्कृत के 'साक्षी' शब्द से बना है, जिसका अर्थ है — प्रत्यक्ष देखने वाला या गवाह। कबीर ने अपने अनुभव से जो सत्य जाना, उसे साखी के रूप में प्रस्तुत किया।
साखियों का उद्देश्य:
- ईश्वर की सच्ची भक्ति और प्रेम का संदेश देना।
- जाति-पाँति, ऊँच-नीच के भेदभाव को दूर करना।
- मीठी वाणी बोलने और अहंकार त्यागने की प्रेरणा देना।
- सांसारिक मोह-माया से मुक्त होकर सत्य की राह अपनाने का उपदेश देना।
Explanation
- परीक्षा में पहले 'साखी' का शाब्दिक अर्थ लिखें, फिर उद्देश्य बिंदुओं में।
- 'साक्षी → साखी' की व्युत्पत्ति लिखना अंक दिलाता है।
- उद्देश्य में भक्ति, समानता, वाणी और त्याग — ये चार मुख्य बिंदु पर्याप्त हैं।
- पाठ्यक्रम के chapter 1 के अनुसार कबीर की साखियाँ ईश्वर प्रेम और मीठी बोली पर केंद्रित हैं।